ईरान को रूस से मिल रही सैन्य सहायता: क्या बदल रहा है शक्ति संतुलन?
ईरान की सैन्य तैयारी में नया मोड़
नई दिल्ली: हाल ही में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए संघर्ष में ईरान ने अपने सैन्य संसाधनों को काफी नुकसान पहुंचाया है, जिसके बाद वह फिर से अपनी सैन्य क्षमताओं को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। एक नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि रूस, कैस्पियन सागर के माध्यम से ईरान को विस्फोटक, ड्रोन के पुर्जे और गोला-बारूद भेज रहा है। यह सहायता ईरान की कमजोर सैन्य स्थिति को पुनः सुदृढ़ करने में सहायक हो सकती है।
NBC न्यूज को प्राप्त एक यूरोपीय सरकारी दस्तावेज और एक पश्चिमी अधिकारी की पुष्टि के अनुसार, रूस द्वारा भेजी जा रही सामग्री में TNT, ड्रोन के हिस्से और गोला-बारूद शामिल हैं। इसके अलावा, विशेषज्ञों द्वारा देखी गई सैटेलाइट तस्वीरों में बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण से संबंधित उपकरणों के संकेत भी मिले हैं।
रूस और ईरान के बीच बदलते रिश्ते
इन सैन्य आपूर्ति को मॉस्को और तेहरान के बीच बदलते रक्षा संबंधों के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पहले, ईरान ने यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस को बड़ी संख्या में शाहेद ड्रोन प्रदान किए थे। अब रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि भूमिकाएं बदल रही हैं और रूस ईरान को अपनी सैन्य क्षमताओं को फिर से तैयार करने में मदद कर रहा है। हालांकि, इस संबंध में रूस और ईरान की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है।
कैस्पियन सागर का महत्व
कैस्पियन सागर, रूस और ईरान के अलावा कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान से घिरा हुआ है। इस क्षेत्र पर इन पांच देशों का अधिकार है, जिससे पश्चिमी देशों के नौसैनिक जहाजों के लिए यहां पहुंचना मुश्किल हो जाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस कारण से रूसी और ईरानी बंदरगाहों के बीच मालवाहक जहाजों को रोकना आसान नहीं है। कुछ जहाज अपने ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम को बंद कर सकते हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखना कठिन हो जाता है। यह मार्ग उन समुद्री रास्तों से अलग है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगियों की मजबूत उपस्थिति है। इसलिए, कैस्पियन सागर सैन्य सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग बन सकता है।
इजराइली हमलों के बाद की स्थिति
ये सैन्य ट्रांसफर इस साल की शुरुआत में इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद सामने आए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, इन हमलों में ईरान के बंदर अंजली को भी निशाना बनाया गया था, जो सैन्य सप्लाई नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था। हाल के संघर्ष में ईरान ने बड़ी संख्या में ड्रोन का उपयोग किया था, जिससे उसके हथियार भंडार को नुकसान पहुंचा। इसके अलावा, अमेरिका और इजराइल के हमलों में मिसाइल ढांचे और अन्य सैन्य ठिकानों को भी लक्ष्य बनाया गया।
रूस से मिल रही यह सहायता ईरान को अपने कुछ हथियार भंडार को फिर से तैयार करने में मदद कर सकती है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि रूस ने कुल कितना सैन्य सामान भेजा है और ईरान की सैन्य तैयारी किस स्तर तक पहुंच चुकी है। भविष्य में यह सैन्य सहयोग क्षेत्र में शक्ति संतुलन को लेकर नई चिंताएं पैदा कर सकता है।
