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ईरान ने अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलें दागी: क्या है इस हमले का असली कारण?

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है, जब अमेरिका ने ईरान पर आरोप लगाया कि उसने बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। CENTCOM ने सभी मिसाइलों को समय पर इंटरसेप्ट कर लिया, जिससे कोई नुकसान नहीं हुआ। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाया गया, और कुवैत तथा कतर ने इस हमले की निंदा की है। यह घटना ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक के बाद हुई, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। जानें इस हमले के पीछे के कारण और क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं।
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पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए बैलिस्टिक मिसाइलें दागी हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, यह हमला अचानक हुआ, लेकिन सभी मिसाइलों को समय पर इंटरसेप्ट कर लिया गया, जिससे किसी भी अमेरिकी ठिकाने को नुकसान नहीं पहुंचा और न ही कोई हताहत हुआ।


CENTCOM का बयान

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ईरान की ओर से कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। अमेरिकी वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह से सक्रिय थी और उसने सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट कर दिया। CENTCOM ने यह भी बताया कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिक पूरी तरह से सतर्क हैं और किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए तैयार हैं।


जॉर्डन में अमेरिकी बेस पर हमला

अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने जॉर्डन में स्थित एक अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाकर मिसाइलें दागी। इसे हाल के समय में अमेरिकी ठिकानों पर की गई सबसे बड़ी सैन्य कार्रवाई माना जा रहा है। हालांकि, प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इस घटना में किसी प्रकार के जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।




कुवैत और कतर की प्रतिक्रिया

हमले के बाद खाड़ी देशों ने अपनी चिंताओं का इजहार किया। कुवैत ने इस कार्रवाई की निंदा करते हुए कहा कि इससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को खतरा हो सकता है। वहीं, कतर ने जॉर्डन की संप्रभुता का समर्थन करते हुए कहा कि किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन स्वीकार नहीं किया जा सकता। दोनों देशों ने तनाव कम करने की अपील भी की।


ट्रंप-नेतन्याहू की बैठक के बाद की घटना

यह घटना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की बैठक के कुछ घंटे बाद सामने आई। दोनों नेताओं के बीच ईरान, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई थी। इसके तुरंत बाद मिसाइल हमले की खबर ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।


सैन्य कार्रवाई की चेतावनी

डोनाल्ड ट्रंप ने पहले कहा था कि यदि ईरान के साथ बातचीत सफल नहीं होती है, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि जरूरत पड़ने पर ईरान के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।