ईरान पर अमेरिका के हवाई हमले: क्या बढ़ रहा है युद्ध का खतरा?
नई दिल्ली में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका ने लगातार 12वीं रात ईरान के विभिन्न क्षेत्रों पर हवाई हमले किए हैं, जिससे दक्षिणी ईरान का सिरिक क्षेत्र धमाकों की आवाजों से गूंज उठा है। इन हमलों ने पश्चिम एशिया में चिंता की लहर पैदा कर दी है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस पर टिकी हुई हैं।
सिरिक में विस्फोटों की आवाज
ईरानी मीडिया के अनुसार, बुधवार रात सिरिक क्षेत्र में कई जोरदार विस्फोट सुनाई दिए। इससे पहले भी अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक द्वीपों को निशाना बनाया था। स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया गया है और प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है।
सेंटकॉम की पुष्टि
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने सोशल मीडिया पर नए हमलों की पुष्टि की है। सेंटकॉम के अनुसार, राष्ट्रपति के निर्देश पर अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर कार्रवाई जारी रखी है। अधिकारियों का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य ईरान की सैन्य गतिविधियों को सीमित करना और समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
निशाने पर सैन्य ठिकाने
अमेरिकी सेना का दावा है कि हाल के अभियानों में एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज साइट, सैन्य ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताओं से जुड़े ठिकानों और लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया गया है। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों से ईरान की सैन्य क्षमता कमजोर होगी और होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा में सुधार होगा।
ईरान का प्रतिरोध
दूसरी ओर, ईरान भी अमेरिकी कार्रवाई का जवाब दे रहा है। हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट में एक तेल टैंकर पर हमले की घटना सामने आई है। इसके अलावा, बहरीन और कुवैत में संभावित मिसाइल हमलों की आशंका के चलते चेतावनी सायरन बजाए गए हैं, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है।
ट्रंप का कड़ा रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि फिलहाल ईरान के साथ बातचीत की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने यह भी इशारा किया कि अमेरिकी सेना आगे ईरान के उन क्षेत्रों को भी निशाना बना सकती है जो उसके प्रमुख यूरेनियम संवर्धन केंद्रों के निकट हैं।
