ईरान में अमेरिकी F-15E जेट क्रैश: एक अधिकारी की 50 घंटे की खतरनाक यात्रा
खतरनाक स्थिति में बचाव
नई दिल्ली: ईरान में एक अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के दुर्घटनाग्रस्त होने के बाद, एक अमेरिकी एयरफोर्स अधिकारी ने लगभग 50 घंटे तक खतरनाक परिस्थितियों में छिपकर अपनी जान बचाई। इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल थे और ईरानी सुरक्षा बल उनकी खोज में थे। अब उन्होंने इस घटनाक्रम के बारे में पहली बार जानकारी साझा की है।
पैराशूट की विफलता
पैराशूट फेल होने से जमीन पर गिरे
रिपोर्ट के अनुसार, F-15E पर तैनात वेपन सिस्टम ऑफिसर को मिशन के दौरान 'ड्यूड 44 ब्रावो' कोडनेम दिया गया था। जब विमान मिसाइल की चपेट में आया, तो पैराशूट सिस्टम ठीक से काम नहीं कर पाया, जिससे वह लगभग 70 से 100 मील प्रति घंटे की गति से जमीन पर गिरे। इस दुर्घटना में उनकी पीठ और कंधे में गंभीर चोटें आईं और कई हड्डियाँ टूट गईं।
50 घंटे तक पहाड़ी इलाके में छिपे
पहाड़ी इलाके में 50 घंटे तक छिपे रहे
घायल होने के बावजूद, अधिकारी ने हार नहीं मानी। वह अपने साथी पायलट 'अल्फा' से लगभग पांच मील दूर गिरे थे। इसके बाद, उन्होंने ईरान के पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्र में छिपकर लगभग दो दिन बिताए। उन्हें डर था कि ईरानी सैनिक किसी भी समय उनकी खोज में वहाँ पहुँच सकते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी सेना लगातार दोनों एयरमैन को खोजने और बचाने की कोशिश कर रही थी।
अमेरिकी सैनिकों का बड़ा अभियान
90 से ज्यादा अमेरिकी सैनिकों ने संभाला मोर्चा
अमेरिका ने इस बचाव के लिए एक बड़ा सैन्य अभियान चलाया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरान की धरती पर 90 से अधिक अमेरिकी सैनिक मौजूद थे, जबकि हवाई और अन्य समर्थन मिशनों में भी बड़ी संख्या में जवान शामिल थे। अमेरिकी सेना ने रेस्क्यू टीम भेजने से पहले इलाके में मौजूद IRGC बलों के खिलाफ बमबारी और ड्रोन का उपयोग किया।
CIA की महत्वपूर्ण भूमिका
CIA ने भी निभाई अहम भूमिका
इस ऑपरेशन में CIA की खुफिया क्षमताओं का भी उपयोग किया गया। अमेरिकी एजेंसियों ने ईरानी सुरक्षा बलों को भ्रमित करने की रणनीति अपनाई, ताकि घायल अधिकारी की वास्तविक स्थिति सुरक्षित रखी जा सके। अंततः लगभग 50 घंटे बाद उन्हें ईरान से सुरक्षित निकाल लिया गया। इस मिशन को हाल के दशकों के सबसे जोखिम भरे अमेरिकी सैन्य रेस्क्यू अभियानों में से एक माना जा रहा है।
