ईरान में अयातुल्ला खामेनेई का अंतिम संस्कार: अमेरिका के हमले से हुई देरी
खामेनेई का दफनाना टला
नई दिल्ली: ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई का दफनाना गुरुवार को निर्धारित था, लेकिन भारी भीड़ और अमेरिका के हमले के कारण इस प्रक्रिया में 8 घंटे की देरी हुई। ईरानी अधिकारियों के अनुसार, देरी का मुख्य कारण इराक में जुलूस के दौरान उमड़ी भीड़ थी। वहीं, IRGC ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने मशहद तक जाने वाले रास्तों को निशाना बनाकर अंतिम विदाई में बाधा डालने का प्रयास किया।
ताबूत का इराक से मशहद तक सफर
खामेनेई का ताबूत इराक के नजफ से ईरान के मशहद की ओर ले जाया जा रहा है। ईरानी समाचार एजेंसी 'मेहेर' के अनुसार, यह उनके 6 दिन लंबे अंतिम संस्कार जुलूस का अंतिम चरण है, जिसमें नजफ और कर्बला जैसे पवित्र स्थलों पर नमाज-ए-जनाजा भी अदा की गई।
खामेनेई के कार्यालय के प्रमुख मोहम्मद मोहम्मदी गोलपायगानी ने बताया कि दिवंगत नेता ने इमाम रजा की दरगाह के पास दफनाने की इच्छा व्यक्त की थी, जिसके कारण ताबूत को मशहद लाया जा रहा है।
अमेरिका के हमले से प्रभावित रेल कनेक्शन
IRGC ने एक बयान में कहा कि अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के कई क्षेत्रों में मशहद जाने वाले दो महत्वपूर्ण पुलों को निशाना बनाया। IRGC का आरोप है कि इस हमले का उद्देश्य अंतिम संस्कार कार्यक्रम को बाधित करना था।
ईरानी मीडिया के अनुसार, गोलिस्तान प्रांत में आक तेकेह खान रेलवे ब्रिज पर तड़के हमला हुआ। 'मेहेर' की रिपोर्ट में कहा गया कि पुल पर एक प्रोजेक्टाइल गिरा, जिसके बाद रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची। IRGC की नयनावा कॉर्ब्स यूनिट ने दावा किया कि अमेरिकी क्रूज मिसाइल से पुल को निशाना बनाया गया।
हमले के बाद दो धमाकों की आवाज सुनाई दी। तेहरान और मशहद को जोड़ने वाली रेलवे लाइन को नुकसान पहुंचा है, लेकिन अधिकारियों ने कहा कि रूट और शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
भीड़ के कारण हुई देरी
अधिकारियों ने बताया कि इराक में जुलूस के दौरान भारी भीड़ जमा हो गई थी। लाखों लोग खामेनेई को अंतिम विदाई देने के लिए सड़कों पर उतर आए थे, जिसके कारण ताबूत को समय पर मशहद नहीं पहुंचाया जा सका और दफनाने में 8 घंटे की देरी हुई। सुरक्षा कारणों से पूरे रूट पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
मशहद में इमाम रजा की दरगाह के आसपास सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है। खामेनेई के निधन के बाद ईरान में यह सबसे बड़ा राजकीय अंतिम संस्कार माना जा रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव के बीच हुए इस हमले ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है।
