ईरान युद्ध से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक: अमेरिका ने जांच तेज की
अमेरिका की जांच प्रक्रिया में तेजी
नई दिल्ली: ईरान के साथ युद्ध से संबंधित संवेदनशील सैन्य जानकारियों के मीडिया में लीक होने के मामले में अमेरिका ने अपनी जांच को और तेज कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप प्रशासन के दौरान पेंटागन ने ज्वाइंट स्टाफ से जुड़े लगभग 50 कर्मचारियों का पॉलीग्राफ टेस्ट किया है। जांच एजेंसियां यह जानने की कोशिश कर रही हैं कि अमेरिकी सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी पत्रकारों तक कैसे पहुंची।
पॉलीग्राफ टेस्ट की प्रक्रिया
पॉलीग्राफ टेस्ट क्या है?
पॉलीग्राफ टेस्ट, जिसे आमतौर पर लाई डिटेक्टर टेस्ट कहा जाता है, में व्यक्ति से प्रश्न पूछे जाते हैं और उसके उत्तर देते समय शारीरिक प्रतिक्रियाओं जैसे सांस, दिल की धड़कन और अन्य बदलावों को रिकॉर्ड किया जाता है। इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर जांचकर्ता यह समझने का प्रयास करते हैं कि व्यक्ति ने किस प्रश्न पर कैसे प्रतिक्रिया दी।
हालांकि, इसे झूठ का ठोस प्रमाण नहीं माना जाता है, क्योंकि तनाव या घबराहट के कारण भी शरीर में बदलाव हो सकते हैं। इसलिए, इसे जांच प्रक्रिया का एक हिस्सा माना जाता है।
हथियारों की कमी से जुड़ी जानकारी का लीक
जानकारी लीक होने का मामला
अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, जांच में ज्वाइंट स्टाफ के लगभग 50 सदस्य शामिल हैं, जिनमें सैन्य अधिकारी और कुछ नागरिक कर्मचारी भी शामिल हैं। पिछले महीने इनसे यह सवाल किया गया कि क्या उन्होंने अमेरिका के घटते हथियार भंडार से संबंधित जानकारी किसी पत्रकार के साथ साझा की थी।
ईरान के साथ संघर्ष के दौरान कुछ रिपोर्टों में अमेरिकी हथियारों के सीमित भंडार की जानकारी सामने आई थी। सैन्य अभियानों के बीच हथियारों की उपलब्धता से जुड़ी जानकारी को अत्यंत संवेदनशील माना जाता है। इसी कारण अमेरिकी अधिकारी यह जानने में जुटे हैं कि यह जानकारी कैसे लीक हुई।
पेंटागन की प्रतिक्रिया
पेंटागन का बयान
पेंटागन ने जांच से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार किया है। प्रवक्ता सीन पार्नेल ने कहा कि विभाग आंतरिक कर्मचारियों या जांच से जुड़े मामलों पर टिप्पणी नहीं करता। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित गोपनीय जानकारी के लीक के मामलों को गंभीरता से लिया जाता है और उनकी जांच की जाती है। अब मुख्य सवाल यह है कि ईरान युद्ध के दौरान अमेरिकी हथियारों की स्थिति से जुड़ी संवेदनशील जानकारी पत्रकारों तक कैसे पहुंची।
