ईरान संकट: ट्रंप के सामने इज़राइल और सऊदी अरब की विपरीत मांगें
नई दिल्ली में ईरान के साथ बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: ईरान के साथ तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद स्थिति बिगड़ती जा रही है। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर विभिन्न दबाव हैं। एक ओर, इज़राइल तेहरान पर सख्ती बढ़ाने की मांग कर रहा है, जबकि दूसरी ओर, सऊदी अरब शांति की अपील कर रहा है। ट्रंप को इस उलझन में आगे का रास्ता तय करना है।
व्हाइट हाउस में दो दिन, दो अलग-अलग दृष्टिकोण
इस सप्ताह व्हाइट हाउस में दो महत्वपूर्ण बैठकें हुईं। मंगलवार को इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ओवल ऑफिस में ट्रंप से मिले। सूत्रों के अनुसार, नेतन्याहू ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत का कोई लाभ नहीं है और उन्होंने तेहरान पर दबाव बढ़ाने की बात की। यदि आवश्यक हुआ, तो बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी रखा गया।
अगले दिन, सऊदी रक्षा मंत्री खालिद बिन सलमान बिना किसी पूर्व सूचना के व्हाइट हाउस पहुंचे। वे क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का संदेश लेकर आए थे। सऊदी नेतृत्व ने ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस से कहा कि तनाव को कम किया जाए, क्योंकि लंबे समय तक चलने वाला टकराव पूरे मध्य पूर्व के लिए खतरनाक हो सकता है। इस प्रकार, दो करीबी सहयोगियों की भिन्न सलाह ने ट्रंप प्रशासन की चुनौतियों को बढ़ा दिया है।
कूटनीति में गतिरोध, ईरान का इनकार
ट्रंप सार्वजनिक रूप से कहते हैं कि ईरान समझौते के लिए 'मिन्नतें' कर रहा है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं हो रही है। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, तेहरान के भीतर कुछ शक्तिशाली लोग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर धमकियां दे रहे हैं और अमेरिकी सेना पर मिसाइल हमलों के जरिए दबाव बना रहे हैं।
ईरान के लगातार इनकार से ट्रंप भी निराश हैं। इसी कारण, उन्होंने शुक्रवार को कैंप डेविड में कैबिनेट की बैठक बुलाई ताकि संकट को समाप्त करने के नए रास्ते खोजे जा सकें। जब उनसे पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा, 'हम बस जीतना चाहते हैं। वे पहले थोड़े मजबूत हैं, फिर कमजोर होंगे और अंततः समाप्त हो जाएंगे।'
सैन्य विकल्प भी मौजूद
हालांकि कूटनीति में गतिरोध है, लेकिन सैन्य योजनाएं तैयार हैं। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यदि ट्रंप हरी झंडी देते हैं, तो सेंट्रल कमांड ईरान के मिसाइल ठिकानों पर 1 से 2 हफ्तों तक बमबारी की योजना बना चुका है। ट्रंप ने कहा, 'हम बड़े पैमाने पर कदम उठाने जा रहे हैं। पहले भी उठाए हैं।'
हालांकि, सेना के वरिष्ठ अधिकारी मानते हैं कि केवल हवाई हमलों से सभी लक्ष्यों को पूरा नहीं किया जा सकता। जॉइंट चीफ्स के चेयरमैन जनरल डैन केन ने कहा कि 'हवाई ताकत की भी सीमाएं होती हैं।' इसके अलावा, एयर डिफेंस इंटरसेप्टर की कमी और नागरिकों के नुकसान का डर भी एक बड़ी चिंता है।
फॉक्स न्यूज़ को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, 'मैं वहां किसे नुकसान पहुंचाऊंगा? आम लोगों को। इसलिए मैं ऐसा नहीं करना चाहता।' अब निर्णय ट्रंप के हाथ में है। इज़राइल हमले की मांग कर रहा है, जबकि सऊदी अरब बातचीत की अपील कर रहा है। ट्रंप को तय करना है कि दबाव बढ़ेगा या तनाव कम होगा।
