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उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों के बाद भूकंप गतिविधियों में वृद्धि

उत्तर कोरिया में परमाणु परीक्षणों के बाद भूकंपों की गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 2017 में हुए परीक्षण के बाद से इस क्षेत्र में भूकंपों की संख्या में तेजी आई है। शोधकर्ताओं ने बताया कि इस क्षेत्र में पहले भूकंपों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन अब स्थिति बदल गई है। अध्ययन में यह भी बताया गया है कि विस्फोट के बाद जमीन अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटी, जिससे भूकंपों की संख्या में वृद्धि हुई है। जानें इस विषय पर और क्या जानकारी मिली है।
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भूकंपों की बढ़ती संख्या

उत्तर कोरिया में परमाणु परीक्षणों के परिणामस्वरूप पहाड़ के नीचे भूकंपों की गतिविधि में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वैज्ञानिकों का कहना है कि 2017 में देश के छठे और सबसे बड़े परमाणु परीक्षण के बाद से इस क्षेत्र में भूकंपों की संख्या में स्पष्ट वृद्धि देखी गई है। माउंट मंताप्सन के आसपास पहले भूकंपों की संख्या बहुत कम थी, लेकिन 2017 के परीक्षण के बाद 6.3 तीव्रता का एक भूकंप आया, जिससे सुरंगों के ढहने और पहाड़ की चोटी के आकार में लगभग 3 मीटर का परिवर्तन हुआ। इसके बाद आए अधिकांश भूकंप 2 से 3 तीव्रता के और उथले थे।


भूकंपों का ऐतिहासिक संदर्भ

दक्षिण कोरिया के पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर किम के अनुसार, चीन और कोरिया के 2000 साल से अधिक के इतिहास में इस क्षेत्र में भूकंपों की संख्या बहुत कम रही है। एक महत्वपूर्ण घटना लगभग 100 किलोमीटर दूर हुई थी, और यहां प्राकृतिक भूकंपों की संभावना को हमेशा कम माना गया है।


2017 के बाद की भूगर्भीय गतिविधियाँ

शोधकर्ताओं का कहना है कि 2017 के विस्फोट के बाद जमीन अपनी पूर्व स्थिति में नहीं लौटी। पहाड़ के अंदर कम से कम दो पुराने फॉल्ट सक्रिय हो गए हैं, और विस्फोट से नई दरारें भी बनी हैं, जिनमें पानी भर गया है। इस दबाव के कारण चट्टानें सरक रही हैं और छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं।


भूकंपों की संख्या का अध्ययन

वैज्ञानिकों ने 2008 से 2025 के बीच के भूकंपीय आंकड़ों का विश्लेषण किया और माउंट मंताप्सन के आसपास कुल 1399 भूकंपों का रिकॉर्ड पाया। यह वही पहाड़ है, जहां उत्तर कोरिया ने 2006 से 2017 के बीच छह भूमिगत परमाणु परीक्षण किए थे। उल्लेखनीय है कि इस पहाड़ और उसके आस-पास के क्षेत्र में पिछले 2000 वर्षों में कोई भूकंप नहीं हुआ था।


असामान्य भूकंप गतिविधियाँ

आमतौर पर, परमाणु विस्फोटों के बाद भूकंपों की संख्या में कमी आती है, लेकिन इस मामले में उलटा देखा गया है। इसलिए, इस अध्ययन के परिणाम असामान्य माने जा रहे हैं। इस क्षेत्र में पहला भूकंप 2013 में दर्ज किया गया था, जो उत्तर कोरिया के तीसरे परमाणु परीक्षण के बाद आया था। इसके बाद कुछ वर्षों तक भूकंपों की संख्या कम रही, लेकिन 2017 में छठे और सबसे बड़े परमाणु परीक्षण के बाद स्थिति बदल गई।


2017 में हुए नुकसान

शोधकर्ताओं ने बताया कि छठे और सबसे बड़े विस्फोट के बाद भूकंपीय गतिविधियों में स्पष्ट वृद्धि हुई। इससे पहले, यह गतिविधि बहुत कम थी। 2017 के परीक्षण से 6.3 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे एक सुरंग के ढहने की संभावना जताई गई थी। यह भी कहा गया कि पहाड़ की चोटी का आकार लगभग 3 मीटर तक बदल गया था।


भूकंपों के कारण

पुसान नेशनल यूनिवर्सिटी के जियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर किम ने बताया कि परीक्षण के बाद दर्ज अधिकांश भूकंपों की तीव्रता 2 से 3 के बीच रही। ये भूकंप जमीन की सतह के करीब आए। उन्होंने यह भी बताया कि परमाणु परीक्षण शुरू होने से पहले इस क्षेत्र में भूकंपीय गतिविधि बहुत कम थी।


भविष्य की संभावनाएँ

शोधकर्ताओं का मानना है कि भूकंपों की बढ़ती संख्या का कारण यह हो सकता है कि 2017 के विस्फोट के बाद माउंट मंताप के नीचे की जमीन अपनी पुरानी स्थिति में वापस नहीं लौटी। प्रोफेसर किम के अनुसार, इस धमाके से पहाड़ के अंदर मौजूद कम से कम दो पुरानी और निष्क्रिय दरारें फिर से सक्रिय हो गई होंगी। धमाके से बनी नई दरारों में पानी भर गया, जिससे दबाव बना और चट्टानें आपस में खिसकने लगीं, जिसके चलते लगातार छोटे-छोटे भूकंप आ रहे हैं।