Newzfatafatlogo

ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन नियमों में बदलाव: भारतीय छात्रों के लिए नई चुनौतियाँ

ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन और वीजा नियमों में हालिया बदलावों ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों, विशेषकर भारतीय छात्रों के लिए नई चुनौतियाँ उत्पन्न की हैं। सरकार ने वीजा हॉपिंग पर सख्ती बरतने और परिवार को लाने में कठिनाई बढ़ाने का निर्णय लिया है। जानें इन बदलावों का क्या प्रभाव पड़ेगा और भारतीय छात्रों को किन नई समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
 | 

ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन नियमों पर चर्चा


नई दिल्ली: ऑस्ट्रेलिया में इमिग्रेशन और वीजा से संबंधित नियमों पर बहस तेज हो गई है। विशेष रूप से अंतरराष्ट्रीय छात्रों, अस्थायी वीजा और वीजा हॉपिंग जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख सख्त होता जा रहा है। देश के आव्रजन और गृह मामलों के मंत्री टोनी बर्क ने हाल ही में एक भाषण में स्पष्ट किया कि उनकी सरकार उन नीतियों का समर्थन करती है जो देश की अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाती हैं।


सरकार का नियंत्रण बढ़ाने का प्रयास

मंत्री ने बताया कि सरकार इस प्रणाली पर बेहतर नियंत्रण चाहती है ताकि इसके दुरुपयोग को रोका जा सके। उन्होंने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया जिसमें कहा गया था कि सरकार निर्माण श्रमिकों की तुलना में अधिक योग शिक्षकों को बुला रही है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले वित्त वर्ष में लगभग 15,000 निर्माण श्रमिकों को वीजा दिया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में तीन गुना अधिक है, जबकि वर्तमान सरकार ने अब तक एक भी योग शिक्षक को वीजा नहीं दिया है। यह उल्लेखनीय है कि योग शिक्षकों का जिक्र इसलिए हो रहा है क्योंकि पूर्व सरकार ने भारत के साथ एक व्यापारिक समझौता किया था, जिसके तहत हर साल 1,800 योग शिक्षकों और शेफ को अस्थायी वीजा देने का प्रावधान था।


वीजा हॉपिंग पर सख्ती

सरकार की चिंता का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय छात्रों द्वारा वीजा हॉपिंग की प्रवृत्ति है। टोनी बर्क ने कहा कि एक वीजा से दूसरे वीजा में बदलना हमेशा गलत नहीं होता। यदि कोई छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काम का अनुभव प्राप्त करता है और फिर सही प्रक्रिया से स्थायी निवास प्राप्त करता है, तो यह उचित है। लेकिन समस्या उन छात्रों से है जो केवल ऑस्ट्रेलिया में अधिक समय बिताने के लिए बार-बार अपने कोर्स और वीजा बदलते हैं। इस पर नियंत्रण के लिए सरकार ने निर्णय लिया है कि छात्रों को अपनी शैक्षणिक योग्यता को बढ़ाना होगा, जैसे बैचलर डिग्री के बाद मास्टर डिग्री करना, न कि केवल वीजा की अवधि बढ़ाने के लिए समान स्तर के विभिन्न कोर्स में दाखिला लेना।


परिवार को लाना होगा कठिन

नए प्रस्तावित नियमों के तहत अब अंतरराष्ट्रीय छात्रों और ग्रेजुएट वीजा धारकों के लिए अपने परिवार को ऑस्ट्रेलिया लाना आसान नहीं होगा। सामान्यतः परिवार के सदस्यों को साथ लाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, हालांकि जो परिवार पहले से ऑस्ट्रेलिया में हैं, उन्हें अलग नहीं किया जाएगा। पीएचडी कर रहे छात्रों और कुछ विशेष देशों के छात्रों को इस नियम में छूट दी जाएगी, लेकिन भारत इस सूची में नहीं है, जिससे भारतीय छात्रों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ेगा।


भारतीय छात्रों के लिए नई चुनौतियाँ

साल 2026 के पहले पांच महीनों के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में पढ़ाई कर रहे विदेशी छात्रों में से 16 प्रतिशत भारतीय हैं। चीन के बाद, भारत ऑस्ट्रेलिया के लिए छात्रों का दूसरा सबसे बड़ा स्रोत है। इस प्रकार, वीजा नियमों में हो रही सख्ती भारतीय छात्रों के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है।