कश्मीर पर एर्दोगन का नया बयान: क्या भारत की नाराजगी बढ़ेगी?
कश्मीर मुद्दे पर एर्दोगन का बयान
नई दिल्ली: तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र महासभा में कश्मीर का मुद्दा उठाकर भारत की नाराजगी को आमंत्रित किया है। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में चल रहे विवादों का समाधान बातचीत के माध्यम से और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुसार किया जाना चाहिए।
मंगलवार को UNGA में अपने संबोधन के दौरान, एर्दोगन ने कश्मीर सहित सभी विवादों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और उससे संबंधित प्रस्तावों के दायरे में हल करने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह बयान पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की उपस्थिति में दिया गया। भारत के लगातार विरोध के बावजूद, एर्दोगन पिछले कई वर्षों से UNGA के मंच से कश्मीर का मुद्दा उठाते आ रहे हैं।
गाजा और फिलिस्तीन पर एर्दोगन की टिप्पणियाँ
गाजा और फिलिस्तीन पर भी बोले एर्दोगन
कश्मीर के अलावा, एर्दोगन ने अपने भाषण में गाजा के लिए अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग की और फिलिस्तीनी राज्य को फिर से मान्यता देने की वकालत की। उन्होंने तुर्की साइप्रस के लोगों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग रखने की स्थिति को समाप्त करने की भी मांग की।
उनके पूरे संबोधन में फिलिस्तीनी मुद्दा प्रमुखता से रहा। एर्दोगन ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास की अनुपस्थिति का भी उल्लेख किया, क्योंकि वे लगातार दूसरे वर्ष UN की बैठक में शामिल नहीं हो सके। इस दौरान, उन्होंने कहा कि तुर्की फिलिस्तीनी लोगों की आवाज उठाने के लिए UN के मंच का उपयोग करता रहेगा। गाजा की वर्तमान स्थिति पर बोलते हुए, उन्होंने इजरायल के सैन्य अभियानों की कड़ी आलोचना की।
एर्दोगन का कश्मीर पर पूर्व का रुख
पहले भी उठा चुके हैं यह मुद्दा
यह पहली बार नहीं है जब एर्दोगन ने UNGA में कश्मीर का जिक्र किया है। उन्होंने पहले भी कई बार इस मुद्दे को उठाया है, हालांकि उनके बयानों का स्वरूप हर बार भिन्न रहा है। 2019 में, उन्होंने अपनी सबसे विवादास्पद टिप्पणी की थी, जब भारत ने अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त किया था। उस समय, एर्दोगन ने कहा था कि लाखों लोग घेराबंदी में हैं और वे कश्मीर से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस विवाद पर ध्यान देने में विफल रहा है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने दी थी कड़ी प्रतिक्रिया
एर्दोगन की टिप्पणियों पर भारत ने कड़ा रुख अपनाया था। भारत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि तुर्की को अन्य देशों की संप्रभुता का सम्मान करना चाहिए और भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से बचना चाहिए। इसके बावजूद, एर्दोगन ने 2019 के बाद से अपने UNGA भाषणों में कश्मीर मुद्दे को बार-बार उठाया है।
