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कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी पर चुप्पी: न्यूयॉर्क मेयर जोहरान ममदानी पर उठे सवाल

फ्लाईदुबई के पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है, लेकिन न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की चुप्पी ने सोशल मीडिया पर बहस को जन्म दिया है। यूजर्स सवाल उठा रहे हैं कि जब मच्छार ने सैकड़ों जानें बचाईं, तो ममदानी ने कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। इस मामले में कई अन्य लिबरल वर्ग भी चुप हैं, जिससे विवाद और बढ़ गया है। जानें इस पूरे मामले की गहराई में क्या है।
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कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा


नई दिल्ली: फ्लाईदुबई के विमान को सुरक्षित बचाने वाले भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की चर्चा पूरी दुनिया में हो रही है। यूएई, भारत, इजरायल और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उनकी बहादुरी की सराहना की है। इस बीच, न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की चुप्पी पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।


सोशल मीडिया पर ममदानी की चुप्पी पर सवाल

सोशल मीडिया पर कई यूजर्स यह सवाल उठा रहे हैं कि जब एक भारतीय पायलट ने सैकड़ों लोगों की जान बचाई, तो ममदानी ने अब तक कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं दी। यूएई के सोशल मीडिया प्रभावशाली अमजद ताहा ने एक्स पर लिखा, "यह चिंताजनक है कि ममदानी ने हमास से जुड़े एक व्यक्ति को पत्रकार का दर्जा दिया, लेकिन कैप्टन स्मित मच्छार की असाधारण बहादुरी पर चुप हैं, जबकि अन्य ने उनकी प्रशंसा की है। आखिर यह चुप्पी क्यों?"


लोगों का कहना है कि ममदानी सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं और गाजा जैसे मुद्दों पर खुलकर बोलते हैं, लेकिन इस घटना पर उनकी चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं।


अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया और विवाद

हालांकि, यह चर्चा केवल ममदानी तक सीमित नहीं है। कई यूजर्स का दावा है कि अमेरिका, ब्रिटेन और भारत में खुद को लिबरल कहने वाले एक बड़े वर्ग ने भी इस मामले पर चुप्पी साध रखी है। कुछ वामपंथी और कट्टरपंथी अकाउंट्स इस घटना को 'फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन' बता रहे हैं, जिससे विवाद और बढ़ गया है।


स्वीडन के पूर्व डिप्लोमेट की टिप्पणी

स्वीडन के पूर्व डिप्लोमेट वोल्फगैंग रिक्टर ने भी इस पर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि यदि कैप्टन मच्छार ने फ्लाईदुबई विमान को ब्रिटेन में उतारा होता, तो उन पर धार्मिक रीति-रिवाज में दखल का आरोप लगाया जाता।


इस मामले में सह-पायलट हमाम अल-हममी पर जिहादी मानसिकता के आरोप लग रहे हैं। ममदानी के आलोचकों का कहना है कि वह 'डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका' से जुड़े हैं और उनकी राजनीति फिलिस्तीन समर्थक मंच पर टिकी है। ऐसे में यदि वह इस आतंकी घटना की निंदा करते हैं और भारतीय कैप्टन का समर्थन करते हैं, तो उनका एक खास वोट बैंक नाराज हो सकता है। इसी कारण उनकी चुप्पी पर और सवाल उठ रहे हैं।