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क्या अमेरिका ईरान पर हमला करेगा? ट्रंप ने दिया राहत भरा संकेत

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हमले की संभावना को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका 25 अक्टूबर को ईरान पर हमला नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने सैन्य विकल्प को खुला रखा है। ट्रंप ने यह भी बताया कि वे ईरान के साथ समझौता करने या सैन्य कार्रवाई जारी रखने पर विचार कर रहे हैं। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद और कूटनीतिक प्रयासों में अनिश्चितता बनी हुई है। जानें इस जटिल स्थिति का क्या असर हो सकता है।
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ट्रंप का ईरान पर हमला न करने का बयान


नई दिल्ली: ईरान पर संभावित हमले को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 अक्टूबर को स्पष्ट किया कि अमेरिका उस दिन ईरान पर हमला नहीं करेगा। हालांकि, उन्होंने सैन्य विकल्प को खुला रखा है। जब एक पत्रकार ने पूछा कि क्या अमेरिका ईरान पर हमला करेगा, तो ट्रंप ने पहले संकोच किया, लेकिन फिर स्पष्ट किया कि आज कोई हमला नहीं होगा। यह उनके पहले के बयान से भिन्न है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका रविवार को ही हमला कर सकता है।


सैन्य कार्रवाई या डील, निर्णय अभी बाकी

रविवार को ट्रंप ने कहा कि वे अभी भी यह तय कर रहे हैं कि ईरान के साथ समझौता किया जाए या सैन्य कार्रवाई जारी रखी जाए। उनके अनुसार, निर्णय इस आधार पर लिया जाएगा कि 'काम पूरा किया जाए' या कोई समझौता हो। इसका मतलब यह है कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य खतरा अभी समाप्त नहीं हुआ है। ईरान ने कहा है कि औपचारिक बातचीत में कोई प्रगति नहीं हुई है, लेकिन फिर भी अमेरिका के साथ कूटनीतिक संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। तेहरान ने वॉशिंगटन की मांगों को 'पूर्ण आत्मसमर्पण' के रूप में खारिज किया है, लेकिन कूटनीतिक रास्ते खुले रखने पर जोर दिया है। बातचीत से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, कतर के मध्यस्थ भी तनाव कम करने के प्रयास में रविवार को तेहरान में थे।


होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद जारी

वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर यह गतिरोध मुख्य मुद्दा बना हुआ है। पाकिस्तान में ईरान के राजदूत ने कहा कि तेहरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के माध्यम से संदेश भेजा है कि यदि वॉशिंगटन अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा ले, तो वह इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने के लिए तैयार है।


हालांकि, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े एक ईरानी स्रोत ने इस पर सवाल उठाया और कहा कि कोई नया प्रस्ताव नहीं दिया गया है। इन विभिन्न बयानों से वॉशिंगटन और तेहरान के बीच कूटनीतिक प्रयासों में अनिश्चितता का संकेत मिलता है, जबकि पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है।