Newzfatafatlogo

क्या अमेरिका और इजरायल के बीच बढ़ेगा तनाव? जानें नेतन्याहू और ट्रंप की राजनीतिक चुनौतियाँ

वाशिंगटन और यरुशलम में बदलते राजनीतिक समीकरणों ने पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति को लेकर नई अनिश्चितता पैदा कर दी है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स की सफलता और इजरायल में नेतन्याहू की बहुमत जुटाने की चुनौती ने दोनों नेताओं की स्थिति को जटिल बना दिया है। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और घरेलू मुद्दों पर मतदाताओं की नाराजगी ने स्थिति को और भी संवेदनशील बना दिया है। क्या कतर की मध्यस्थता से शांति की संभावना बढ़ेगी या तनाव और बढ़ेगा? जानें इस लेख में।
 | 

नई राजनीतिक चुनौतियों का सामना


वाशिंगटन और यरुशलम में बदलते राजनीतिक परिदृश्य ने पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति को लेकर नई अनिश्चितता उत्पन्न कर दी है। अमेरिकी मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेटिक पार्टी की सफलता के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संसद के दोनों सदनों में विरोध का सामना करना पड़ सकता है। वहीं, इजरायल में हालिया चुनावों के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को बहुमत हासिल करने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में दोनों नेताओं ने एक-दूसरे का समर्थन किया है, लेकिन घरेलू राजनीतिक दबाव ने उनकी साझा रणनीति को चुनौती दी है। अयातुल्ला अली खामेनेई की मृत्यु के कई महीने बाद भी संघर्ष का समाधान नहीं निकल सका है।


ट्रंप की राजनीतिक स्थिति पर असर

मध्यावधि चुनावों में डेमोक्रेट्स ने प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी ने कम से कम सात सीनेट सीटें जीती हैं, जिनमें कंसास, आयोवा, टेक्सास, ओहियो, मेन, नॉर्थ कैरोलिना और साउथ कैरोलिना शामिल हैं। इसके अलावा, दो दर्जन से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में भी डेमोक्रेट्स ने सफलता प्राप्त की है। जनवरी 2027 में नई कांग्रेस के कार्यभार संभालने पर ट्रंप प्रशासन के सैन्य निर्णयों और बजट की जांच की जा सकती है। हकीम जेफ्रीज के प्रतिनिधि सभा के अध्यक्ष बनने की संभावना भी जताई जा रही है। ट्रंप ने चुनाव परिणामों को व्यक्तिगत नुकसान मानने से इनकार किया है।


मतदाताओं की नाराजगी के कारण

चुनावी सर्वेक्षणों में घरेलू अर्थव्यवस्था और विदेशी सैन्य कार्रवाइयों के प्रति असंतोष प्रकट हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 90 प्रतिशत मतदाताओं ने महंगाई को प्रमुख मुद्दा माना, जबकि 66 प्रतिशत ने कीमतों में वृद्धि के लिए राष्ट्रपति को जिम्मेदार ठहराया। एपी के मतदाता सर्वेक्षण में करीब 60 प्रतिशत लोगों ने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को गलत बताया। होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल और डीजल की कीमतों में वृद्धि ने अमेरिकी परिवारों के खर्च पर भी असर डाला है।


सैन्य गतिविधियों का बढ़ता दायरा

मतदान से कुछ घंटे पहले, 2 नवंबर को अमेरिका ने होर्मुज क्षेत्र के निकट ईरानी ठिकानों पर हमले किए। ईरानी मीडिया ने केशम, हेंगाम द्वीप और बंदर अब्बास के आसपास धमाकों की सूचना दी। अमेरिकी अधिकारियों ने इसे रक्षात्मक कार्रवाई बताते हुए कहा कि निशाना एक एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल ठिकाना था। ट्रंप ने इसे सीमित हमला बताया। क्षेत्र में नौसैनिक नाकेबंदी जारी है और एक अन्य अमेरिकी विमानवाहक पोत भी वहां की दिशा में बढ़ रहा है।


नेतन्याहू की बहुमत जुटाने की चुनौती

27 अक्टूबर के इजरायली चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गठबंधन को 120 सदस्यीय नेसेट में 53 सीटें मिलीं। हालांकि, सरकार बनाने के लिए आवश्यक 61 सदस्यों का समर्थन जुटाने में गठबंधन पीछे रह गया। विपक्षी गठबंधन को 48 और अरब दलों को 19 सीटें मिलीं। नेतन्याहू ने चुनाव में गड़बड़ी के आरोप लगाए, लेकिन चुनाव आयोग ने संगठित धांधली के दावों को खारिज कर दिया।


कतर की मध्यस्थता से बातचीत की संभावनाएँ

कतर के माध्यम से अप्रत्यक्ष वार्ता जारी है। ईरान बातचीत से पहले नौसैनिक नाकेबंदी हटाने, तेल प्रतिबंधों में राहत और लेबनान में युद्धविराम चाहता है। अमेरिका दूसरी ओर परमाणु संवर्धन कार्यक्रम और होर्मुज में ईरान की सैन्य गतिविधियों को समाप्त करने की मांग कर रहा है। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बातचीत से समाधान निकलने की उम्मीद जताई है।


क्या युद्ध का दायरा फिर बढ़ सकता है?

रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू ने अमेरिकी चुनाव के बाद ईरान पर बड़े हवाई हमले करने का आग्रह किया था, हालांकि ट्रंप ने तत्काल ऐसी कार्रवाई की स्पष्ट सहमति नहीं दी। जनवरी 2027 से अमेरिकी संसद में युद्ध के खर्च और औचित्य पर सवाल उठेंगे, जबकि इजरायल में नेतन्याहू को सरकार बनाने की चुनौती रहेगी। आने वाले सप्ताह यह तय करेंगे कि कतर की मध्यस्थता शांति का रास्ता खोलती है या राजनीतिक दबाव इस संघर्ष को और खतरनाक मोड़ पर ले जाता है।