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क्या अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होगा? कतर की मध्यस्थता में आई रुकावट

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने के लिए कतर की मध्यस्थता एक बार फिर विफल रही है। हाल की बैठकों में दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। ईरान ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने की मांग की, जबकि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की शर्त रखी। जानें इस बातचीत में क्या हुआ और आगे की संभावनाएं क्या हैं।
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अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का नया दौर


नई दिल्ली: कतर की मध्यस्थता से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को कम करने की कोशिशें एक बार फिर असफल रही हैं। हाल ही में हुई महत्वपूर्ण बैठकों के बावजूद, दोनों देशों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। सोमवार को कतर के प्रमुख मध्यस्थ अली अल-थवादी ने न्यूयॉर्क में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ कई घंटे बातचीत की। इस चर्चा में कतर के दो पन्नों के प्रस्ताव पर विचार हुआ। ईरान ने अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पूरी तरह हटाने की मांग की, जबकि अमेरिका ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने की शर्त रखी।


बातचीत में उम्मीद और निराशा

सोमवार की शाम, अल-थवादी वॉशिंगटन पहुंचे और ट्रंप के दूत जेरेड कुशनर से मुलाकात की। इस बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी शामिल थे, लेकिन व्हाइट हाउस ने इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया।


सुबह की उम्मीद, शाम की निराशा


सोमवार की सुबह व्हाइट हाउस में सकारात्मक माहौल था। अधिकारियों ने कहा कि बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है और ईरान परमाणु मुद्दे पर नरमी दिखा सकता है। यह भी बताया गया कि यदि ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो ट्रंप प्रतिबंधों में ढील देने और रोके गए फंड को जारी करने के लिए तैयार हैं। लेकिन कुछ घंटों बाद, ट्रंप ने 'ट्रूथ सोशल' पर लिखा कि उन्होंने ईरान को कोई प्रस्ताव नहीं दिया। इसके बाद स्थिति बदल गई।


वार्ता में गतिरोध

दोनों पक्षों की दलीलें


एक सूत्र के अनुसार, वार्ता पूरी तरह से अटक गई है। ईरान ऐसी शर्तें रख रहा है जिन्हें अमेरिका स्वीकार नहीं कर सकता, और अमेरिका खुद को मजबूत मानकर समझौते की आवश्यकता नहीं समझ रहा है। पाकिस्तान और मिस्र ने भी ईरान पर परमाणु मुद्दे में ढील देने का दबाव डाला है। ईरान ने कहा कि वह तभी विचार करेगा जब अमेरिका पिछले साल जून के समझौते पर लौटे। ईरानी अधिकारी मोहसिन रजाई ने कहा कि ट्रंप निर्णय लेने में सक्षम नहीं हैं। ट्रंप ने जवाब में कहा कि ईरान अंततः झुकेगा, क्योंकि उसे परमाणु हथियार नहीं मिलेंगे।


कतर ने प्रयास जारी रखा है, लेकिन उसके मध्यस्थ अब निराश होते जा रहे हैं। अमेरिकी अधिकारियों को चिंता है कि मिड-टर्म चुनाव के बाद ट्रंप एक बड़ा सैन्य अभियान फिर से शुरू कर सकते हैं।