क्या अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित करेगा?
नई दिल्ली में अमेरिका-ईरान संबंधों पर बहस
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के चलते अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों पर नई चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक विश्लेषक और युद्ध मामलों के विशेषज्ञ वायल अव्वाद का कहना है कि अमेरिका ईरान के साथ हुए शांति समझौते की मूल भावना का पालन नहीं कर रहा है। उनके अनुसार, हाल की घटनाएं यह दर्शाती हैं कि दोनों देशों के बीच तनाव में कमी आने के बजाय यह लगातार बढ़ रहा है।
जहाज पर हमले के बाद विवाद की स्थिति
मिडिल ईस्ट मामलों के विशेषज्ञ डॉ. वायल अव्वाद ने एक साक्षात्कार में कहा कि ओमान के निकट एक जहाज पर हुए हमले ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र की स्थिति अभी भी अत्यंत संवेदनशील है। उनके अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच जिस समझौते के माध्यम से तनाव को कम करने का प्रयास किया गया था, उसका वास्तविक प्रभाव दिखाई नहीं दे रहा है। उनका कहना है कि दोनों पक्षों के बीच अविश्वास बना हुआ है, जिससे समुद्री मार्गों पर तनाव बढ़ रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते मतभेद
विशेषज्ञ ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद गहराते जा रहे हैं। उनका आरोप है कि समुद्री आवाजाही और सुरक्षा को लेकर दोनों पक्ष अलग-अलग दावे कर रहे हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही और सुरक्षा को लेकर तनाव बढ़ता जा रहा है।
इजरायल की भूमिका पर सवाल
वायल अव्वाद ने यह भी कहा कि क्षेत्र में इजरायल की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उनके अनुसार, मौजूदा हालात ऐसे बन रहे हैं जो संघर्ष को और बढ़ा सकते हैं। उनका मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं होते हैं, तो मध्य पूर्व में लंबे समय तक अस्थिरता बनी रह सकती है।
अमेरिका की नई सैन्य कार्रवाई
इस बीच, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि होर्मुज क्षेत्र में एक कंटेनर जहाज पर हुए कथित हमले के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नई सैन्य कार्रवाई की है। वहीं, खाड़ी क्षेत्र के कई देशों ने भी सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है। संयुक्त अरब अमीरात ने नागरिकों से आधिकारिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
कूटनीति पर बढ़ती नजरें
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों पक्ष बातचीत के माध्यम से समाधान नहीं निकालते हैं, तो इसका प्रभाव वैश्विक व्यापार, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है। वर्तमान में, दुनिया की नजरें आगामी कूटनीतिक और सैन्य कदमों पर टिकी हुई हैं।
