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क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत सफल होगी? ट्रंप ने दी चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ बातचीत में विफलता की स्थिति में सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि बातचीत गंभीर है, लेकिन समय सीमित है। ईरान ने जवाब में कहा है कि युद्ध या शांति का निर्णय केवल तेहरान करेगा। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में तनाव बढ़ रहा है, और सभी की नजर इस बात पर है कि क्या ट्रंप की डेडलाइन से पहले कोई समझौता हो पाएगा।
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अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती कूटनीतिक गतिविधियाँ


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीति की गतिविधियाँ तेजी से बढ़ रही हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान के साथ बातचीत विफल होती है, तो अमेरिका सैन्य विकल्प पर विचार करेगा। उन्होंने इसे 'बहुत कड़ा सैन्य एक्शन' कहा।


'जल्द निर्णय की आवश्यकता'

Axios को दिए गए एक साक्षात्कार में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 'गंभीर बातचीत' चल रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ये वार्ताएँ सफल नहीं होती हैं, तो अमेरिका कड़े सैन्य कदम उठाने के लिए तैयार है। जब उनसे समय सीमा के बारे में पूछा गया, तो ट्रंप ने कहा, 'बहुत अधिक समय नहीं है। या तो यह प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ेगी या बिल्कुल नहीं।'


उन्होंने यह भी बताया कि मध्यस्थ देशों की अपील पर उन्होंने पिछले सप्ताह अमेरिकी हमले को रोका था। ट्रंप ने कहा, 'ईरान के मामलों पर नजर रखने वाले सभी ने कहा - हमला मत करो। इसलिए मैंने इसे रोक दिया। इससे न तो कुछ हासिल हुआ और न ही कुछ खोया।' उन्होंने यह भी कहा कि हमले को रोकने से तेल की कीमतें गिरीं और अमेरिकी शेयर बाजार में वृद्धि हुई।


बातचीत के मुद्दे

वर्तमान में बातचीत का ध्यान दो मुख्य मुद्दों पर है - होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नया समझौता। यह बातचीत सीधे नहीं हो रही है, बल्कि ईरान और ओमान मध्यस्थ के रूप में कार्य कर रहे हैं। कतर, पाकिस्तान और मिस्र भी इस प्रक्रिया में शामिल हैं। ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ़ और जेरेड कुशनर इस वार्ता की निगरानी कर रहे हैं।


यह पहल अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ लगभग दो हफ्ते तक हवाई हमले रोकने के बाद शुरू हुई है। ट्रंप मंगलवार को व्हाइट हाउस में इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा, 'यदि मैं राष्ट्रपति नहीं होता, तो ईरान के पास अब तक परमाणु हथियार होते और इज़राइल बर्बाद हो चुका होता।'


ईरान का जवाब: निर्णय हमारा है

ट्रंप के बयान के कुछ घंटों बाद, ईरान ने प्रतिक्रिया दी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि युद्ध या शांति का निर्णय केवल तेहरान करेगा। उन्होंने कहा, 'हमने अमेरिका को यह तय करने की अनुमति नहीं दी है और न देंगे कि कब युद्ध होगा। जब हमारे हितों की रक्षा की आवश्यकता होगी, तब हम कार्रवाई करेंगे।'


बघाई ने उन रिपोर्टों को भी खारिज किया जिनमें कहा गया था कि ईरान ने अमेरिका से सीधे बातचीत की मांग की है। उन्होंने कहा, 'यह हमारे स्वभाव में नहीं है। बातचीत केवल बिचौलियों के माध्यम से ही होगी।'


खाड़ी में तनाव की स्थिति

कूटनीति के बीच क्षेत्र में हमले भी जारी हैं। सऊदी अरब ने कहा कि उसने पूर्वी प्रांत और रियाद में पेट्रोलियम ठिकानों को निशाना बनाने वाले ड्रोन गिराए हैं। आरोप ईरान समर्थित मिलिशिया पर लगाया गया है। यमन के हूथियों ने यानबू बंदरगाह पर हमले की जिम्मेदारी ली है। जॉर्डन ने दो ड्रोन को मार गिराया है।


इराक में भी ईरानी कुर्द समूहों के कैंप ड्रोन हमलों का निशाना बने हैं। कूटनीति और तनाव दोनों एक साथ चल रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि ट्रंप की निर्धारित समय सीमा से पहले कोई समझौता हो पाता है या नहीं।