क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध का खतरा बढ़ रहा है? जानें ताजा हालात
मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव की स्थिति लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे सैन्य संघर्ष ने गंभीर मोड़ ले लिया है। पिछले छह रातों से अमेरिकी सेना ने ईरान के महत्वपूर्ण ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं, जिसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि हाल ही में हुआ अस्थायी समझौता अब प्रभावहीन नजर आ रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में युद्ध का खतरा फिर से बढ़ गया है।
अमेरिकी सेना का नया अभियान
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि उसकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने के लिए एक नया अभियान शुरू किया है। यह लगातार छठी रात थी जब अमेरिकी सेना ने ईरान के विभिन्न हिस्सों पर हमले किए। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, हमलों में दक्षिणी क्षेत्र में स्थित दो पुलों, एक रेलवे स्टेशन और एक एयरपोर्ट को निशाना बनाया गया। यह क्षेत्र होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट है, जो विश्व के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है। इसी रास्ते से वैश्विक स्तर पर बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है।
हमलों में जान-माल का नुकसान
ईरानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, होर्मोजगान प्रांत में पुलों पर हुए हमलों में तीन लोगों की जान चली गई। इसके अलावा, बुशेहर शहर में भी विस्फोट की खबरें आई हैं। बुशेहर वही स्थान है जहां ईरान का प्रमुख नागरिक परमाणु बिजलीघर स्थित है। हालांकि, इन हमलों से परमाणु संयंत्र को कितना नुकसान हुआ, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी तक नहीं आई है। ईरान ने इन हमलों को अमेरिका की लगातार सैन्य कार्रवाई का परिणाम बताया और इसकी कड़ी निंदा की है।
होर्मुज जलडमरूमध्य का तनाव
लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक तेल और गैस का व्यापार होर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से होता है। इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव पूरी दुनिया के ऊर्जा बाजार के लिए चिंता का विषय बन गया है। कुछ सप्ताह पहले दोनों पक्षों के बीच संघर्ष कम करने के लिए एक अस्थायी समझौता हुआ था, लेकिन अब हालात फिर से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं। लगातार हो रहे हमलों के कारण यह समझौता लगभग निष्प्रभावी होता नजर आ रहा है।
ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो अमेरिका उसके बिजलीघरों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बना सकता है। व्हाइट हाउस ने यह भी कहा है कि अमेरिका अब भी बातचीत के रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं मानता और कूटनीतिक समाधान के लिए तैयार है। दूसरी ओर, ईरान ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि उसके नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमले किए गए, तो वह पूरे क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई करेगा।
कतर पर हमले का खतरा
ईरान पहले बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले कर चुका है। हालांकि, अब तक उसने कतर को सीधे निशाना नहीं बनाया था। लेकिन हाल ही में कतर की राजधानी दोहा में कई तेज धमाकों की आवाज सुनाई दी, जिससे यह संकेत मिलता है कि ईरान अब संघर्ष का दायरा और बढ़ा सकता है। कतर और ईरान के बीच लंबे समय से अच्छे संबंध रहे हैं, और इसी कारण कतर ने मौजूदा संकट के दौरान कई बार दोनों पक्षों के बीच संवाद कायम रखने की कोशिश की थी।
