क्या अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम टूटने का खतरा बढ़ गया है?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच हुए अंतरिम युद्धविराम पर संकट के बादल छा गए हैं। चार महीने तक चले संघर्ष के बाद जिस समझौते से शांति की उम्मीद जगी थी, वह अब विवादों में उलझ गया है। दोनों देशों ने एक-दूसरे पर युद्धविराम की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ गया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब होर्मुज जलडमरूमध्य में एक व्यावसायिक जहाज पर ड्रोन हमला हुआ।
अमेरिका का आरोप और जवाबी कार्रवाई
अमेरिका ने इस हमले के लिए ईरान को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया और इसे युद्धविराम का उल्लंघन बताया। इसके बाद, अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) के अनुसार, इस ऑपरेशन में मिसाइल और ड्रोन भंडारण केंद्रों के साथ-साथ तटीय रडार सिस्टम को निशाना बनाया गया। सेना ने इस कार्रवाई का वीडियो भी जारी किया, जिसमें कहा गया कि यह वाणिज्यिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए किया गया था।
ईरान का खंडन
ईरान ने अमेरिका के आरोपों को पूरी तरह से निराधार बताया है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि अमेरिकी हमले में सिरिक के आसपास के क्षेत्र को निशाना बनाया गया, जबकि ईरानी बल केवल समुद्री नियमों का पालन करवा रहे थे। सरकारी मीडिया के अनुसार, पहले चेतावनी दी गई थी और उसके बाद ही सीमित कार्रवाई की गई। ईरान का कहना है कि यह कदम सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा था, न कि युद्धविराम तोड़ने की कोशिश।
जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई जारी रखी, तो उसका और अधिक व्यापक जवाब दिया जाएगा। गार्ड्स का कहना है कि युद्धविराम समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान के अधिकारों को स्वीकार किया गया था।
महत्वपूर्ण जलमार्ग का विवाद
यह विवाद होर्मुज जलडमरूमध्य के महत्व से भी जुड़ा है, जो वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस के लिए एक प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग है। युद्धविराम के बाद, ईरान ने इस जलमार्ग पर निगरानी की बात कही थी, जबकि अमेरिका ने कहा कि यहां अंतरराष्ट्रीय जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के होनी चाहिए।
कूटनीतिक पहल के बीच तनाव
जहां अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है, वहीं एक अन्य महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल भी सामने आई है। अमेरिका की मध्यस्थता में इज़राइल और लेबनान के बीच एक ढांचागत समझौते पर सहमति बनी है, जिसका उद्देश्य सीमा पर जारी टकराव को कम करना है। हालांकि, ईरान समर्थित हिज़्बुल्लाह ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है।
