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क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता 19 जून को होगा? जानें सभी महत्वपूर्ण बातें

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने बताया कि प्रस्तावित समझौते को डिजिटल रूप से मंजूरी मिल चुकी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ऐतिहासिक करार दिया है, जो मध्य पूर्व में स्थिरता लाने की उम्मीद जगाता है। 19 जून को जिनेवा में होने वाले हस्ताक्षर समारोह पर सभी की नजरें टिकी हैं। जानें इस समझौते के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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क्या अमेरिका और ईरान के बीच समझौता 19 जून को होगा? जानें सभी महत्वपूर्ण बातें

अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में नई प्रगति


नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ताओं में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने बताया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित समझौते को डिजिटल रूप से मंजूरी मिल चुकी है। यह जानकारी ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि समझौता लगभग तैयार है और इसके औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में होंगे।


वैंस का बयान

एक अमेरिकी टीवी शो में वैंस ने कहा कि समझौते को पहले ही इलेक्ट्रॉनिक तरीके से स्वीकृति मिल चुकी है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान को आर्थिक राहत या प्रतिबंधों में ढील तभी मिलेगी जब वह निर्धारित शर्तों का पालन करेगा।


वैंस ने बताया कि अमेरिका की नीति प्रदर्शन-आधारित होगी। यदि ईरान अपने संवर्धित परमाणु भंडार को कम करता है और अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्था को लागू करता है, तभी उस पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी जाएगी। उनका कहना था कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे न बढ़े।


उन्होंने यह भी कहा कि समझौते का मुख्य उद्देश्य केवल प्रतिबंधों में ढील देना नहीं है, बल्कि ईरान को वैश्विक अर्थव्यवस्था में फिर से शामिल करने का अवसर प्रदान करना भी है। वैंस ने संकेत दिया कि यदि तेहरान सभी शर्तों का पालन करता है, तो उसके लिए अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक गतिविधियों के नए रास्ते खुल सकते हैं।


ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान ने भी पुष्टि की है कि 19 जून को समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। हालांकि, ईरानी अधिकारियों ने यह भी बताया है कि यह समारोह वर्चुअल माध्यम से हो सकता है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान की ओर से कौन प्रतिनिधित्व करेगा, लेकिन संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बघर ग़ालिबफ़ और विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरघची के नाम प्रमुख दावेदारों में शामिल हैं।


डोनाल्ड ट्रंप का दृष्टिकोण

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस संभावित समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए कहा है कि इससे मध्य पूर्व में स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि समझौते के लागू होने के बाद क्षेत्र में ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों को भी लाभ होगा। ट्रंप के अनुसार, यह समझौता लंबे समय से चल रहे तनाव को कम करने और क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।


अब सभी की नजरें 19 जून पर हैं, जब इस समझौते को औपचारिक रूप देने की प्रक्रिया पूरी होने की उम्मीद है।