क्या इजरायल ईरान के खिलाफ नया सैन्य अभियान शुरू करेगा? नेतन्याहू के बयान से बढ़ी चिंताएं
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम के टूटने के बाद पश्चिम एशिया में तनाव फिर से बढ़ गया है। इस बीच, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के हालिया बयान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। नेतन्याहू ने स्पष्ट रूप से कहा कि "युद्ध खत्म नहीं हुआ है" और इजरायल किसी भी परिस्थिति का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है। उनके इस बयान ने नए सैन्य अभियानों की अटकलों को जन्म दिया है।
हवाई शक्ति पर जोर
गुरुवार को हत्जेरिम एयर बेस पर इजरायल वायुसेना के दीक्षांत समारोह में नेतन्याहू ने कहा कि देश की हवाई शक्ति उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा की सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने कहा कि हाल की घटनाओं में ईरान को नुकसान हुआ है, लेकिन खतरा अभी भी बना हुआ है।
उन्होंने यह भी कहा कि इजरायल किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा। उनके अनुसार, यदि समय पर कार्रवाई नहीं की गई, तो ईरान परमाणु क्षमता प्राप्त कर सकता है।
युद्धविराम के टूटने के बाद की स्थिति
नेतन्याहू का यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ईरान के साथ युद्धविराम समाप्त होने की बात की है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाकर समझौते का उल्लंघन किया है।
इसके बाद अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए और तेल निर्यात पर नए प्रतिबंध लगाए। ईरान ने इसके जवाब में बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले करने का दावा किया।
क्या इजरायल फिर से बड़ा हमला करेगा?
इजरायल के सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एयाल जमीर ने भी संकेत दिए हैं कि तेहरान के खिलाफ सैन्य अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि सेना नई रणनीतियों पर काम कर रही है और भविष्य की चुनौतियों के लिए पूरी तरह तैयार है।
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने कहा कि यदि हालात की मांग हुई तो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू की जा सकती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इजरायल का रक्षा तंत्र हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
पश्चिम एशिया पर दुनिया की नजर
नेतन्याहू के बयान के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या इजरायल ईरान के खिलाफ कोई बड़ा सैन्य कदम उठाने की तैयारी कर रहा है। फिलहाल, दोनों देशों के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और पूरी दुनिया की नजर पश्चिम एशिया की बदलती परिस्थितियों पर टिकी हुई है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
