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क्या इबोला का नया प्रकोप कांगो में बन रहा है एक गंभीर संकट?

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिससे 3,007 लोगों की मौत हो चुकी है और 6,186 लोग संक्रमित हैं। स्वास्थ्य एजेंसियों और सरकारों की चिंता बढ़ गई है। इस प्रकोप की गंभीरता को देखते हुए, विशेषज्ञ इसे 2018-2020 के प्रकोप के समान मान रहे हैं। जानें इस संकट के पीछे के कारण और स्वास्थ्य व्यवस्था की चुनौतियाँ।
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इबोला का बढ़ता खतरा


नई दिल्ली: कोरोना वायरस महामारी की भयानक यादें अभी भी ताजा हैं, और अब अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में एक नई जानलेवा बीमारी ने चिंता बढ़ा दी है। डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला के प्रकोप के तेजी से फैलने की खबरें आ रही हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से अब तक 3,007 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि संक्रमितों की संख्या 6,186 तक पहुंच गई है। इन बढ़ते आंकड़ों ने स्वास्थ्य एजेंसियों और विभिन्न देशों की सरकारों को चिंतित कर दिया है।


रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष कांगो में इबोला का प्रकोप देश के इतिहास में सबसे गंभीर संकटों में से एक बनता जा रहा है। यह संक्रमण उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से शुरू होकर कई अन्य क्षेत्रों में फैल चुका है, जिससे बड़ी जनसंख्या इसके खतरे में है। लगातार बढ़ती मौतों ने स्थानीय समुदायों में भय का माहौल पैदा कर दिया है।


इबोला का कहर

शहर दर शहर इबोला का 'कहर'


गुरुवार को जारी होने वाले नए स्वास्थ्य बुलेटिन में संक्रमितों और मृतकों की संख्या में और वृद्धि की संभावना जताई गई है। कांगो में इबोला के फैलने की आधिकारिक घोषणा 15 मई को इतुरी प्रांत में की गई थी। हालांकि, कुछ स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संक्रमण की शुरुआत जनवरी 2026 में ही हो गई थी।


कांगो की सरकार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और राहत एजेंसियां इस संक्रमण को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही हैं। इसके बावजूद, इबोला अब छह प्रांतों में फैल चुका है। बीमारी पर नियंत्रण पाने में सबसे बड़ी चुनौती कमजोर निगरानी प्रणाली, असुरक्षा और स्थानीय समुदायों का विरोध है। इन कारणों से संक्रमित व्यक्तियों की समय पर पहचान और उपचार में बाधा उत्पन्न हो रही है।


क्या 2026 का प्रकोप सबसे खतरनाक?

क्या 2026 का प्रकोप सबसे खतरनाक?


2026 में सामने आया इबोला संकट कांगो के लिए अत्यंत गंभीर माना जा रहा है। इसकी तुलना 2018-2020 के बड़े प्रकोप से की जा रही है। वहीं, पश्चिम अफ्रीका में 2014-2016 के दौरान फैले इबोला ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया था, जिसमें गिनी, लाइबेरिया और सिएरा लियोन में 28,600 से अधिक लोग संक्रमित हुए और 11,000 से ज्यादा मौतें हुईं।


महामारी का इतिहास

कब-कब महामारी ने डराया?


कोविड-19 से पहले, 1918-1919 की इन्फ्लुएंजा महामारी को मानव इतिहास की सबसे घातक महामारियों में से एक माना जाता था। इस वायरस ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बड़ी संख्या में लोगों की जान ली थी, जिसमें अनुमानित 5 से 10 करोड़ मौतें हुईं। इसके बाद 1957-58 का एशियाई फ्लू, 1968-69 का हांगकांग फ्लू और 2009-10 का स्वाइन फ्लू भी वैश्विक स्वास्थ्य के लिए बड़ी चुनौतियां बने।


कोरोना महामारी में आधिकारिक तौर पर दुनियाभर में लगभग 71 लाख मौतों की पुष्टि हुई है। हालांकि, अतिरिक्त और अप्रत्यक्ष मौतों को जोड़ने पर WHO और अन्य आंकड़ा एजेंसियों ने वास्तविक संख्या 1.8 करोड़ से 3 करोड़ के बीच होने का अनुमान लगाया है।