क्या इमरान खान की पार्टी से हाथ मिलाने जा रहे हैं बिलावल भुट्टो? जानें गिलगित में क्या हो रहा है!
पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल
नई दिल्ली: पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार के खिलाफ अंदरूनी राजनीति में हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता बिलावल भुट्टो ने जेल में बंद इमरान खान की पार्टी, पीटीआई, के साथ गठबंधन की संभावनाओं पर विचार करना शुरू कर दिया है। यह गठबंधन गिलगित बाल्टिस्तान में हाल ही में हुए विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हो सकता है।
गिलगित में सरकार बनाने की कोशिश
जियो न्यूज उर्दू के अनुसार, गिलगित बाल्टिस्तान विधानसभा में कुल 24 सीटें हैं, और सरकार बनाने के लिए 13 विधायकों का समर्थन आवश्यक है। इस बार बिलावल की पार्टी ने 10 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सामने आई है।
शहबाज शरीफ की पार्टी के पास 5 विधायक हैं, जबकि इमरान खान की पीटीआई के पास 2 सीटें हैं। बिलावल ने सरकार बनाने के लिए पीटीआई से संपर्क किया है। यदि इमरान की पार्टी समर्थन देती है, तो यह शहबाज सरकार के लिए एक बड़ा झटका हो सकता है।
क्या बिलावल 2022 का बदला ले रहे हैं?
2022 में इमरान खान को सत्ता से हटाने में बिलावल भुट्टो की पार्टी ने शहबाज शरीफ का समर्थन किया था। इसके बाद 2024 के चुनाव में शहबाज प्रधानमंत्री बने। बिलावल की पार्टी को बलूचिस्तान और सिंध में सरकार बनाने का अवसर मिला, जबकि पंजाब में शहबाज की पार्टी की सरकार बनी। खैबर पख्तूनख्वा में इमरान की पार्टी ने सत्ता हासिल की।
हालांकि, अब बिलावल शहबाज सरकार से असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। हाल के केंद्रीय बजट के दौरान उन्होंने खुलकर विरोध किया था। राज्यपालों की नियुक्ति को लेकर भी दोनों नेताओं के बीच मतभेद सामने आए हैं।
बिलावल की राजनीतिक ताकत
नेशनल असेंबली में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के पास 74 सीटें हैं। कुल 332 सीटों वाली असेंबली में सरकार बनाने के लिए 167 सीटों की आवश्यकता होती है। शहबाज शरीफ की पार्टी के पास वर्तमान में 131 सीटें हैं, जो बहुमत से काफी दूर हैं।
पी सिंध, इस्लामाबाद, बलूचिस्तान, गिलगित और पीओके में मजबूत स्थिति में है। यदि बिलावल और इमरान के बीच गठबंधन होता है, तो पाकिस्तान की राजनीति में बड़ा बदलाव आ सकता है। दोनों पार्टियों का एक साथ आना शहबाज सरकार पर दबाव बढ़ा सकता है और सत्ता समीकरण को पूरी तरह बदल सकता है।
फिलहाल, पीटीआई की ओर से इस प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन यदि दोनों पार्टियां एकजुट होती हैं, तो यह शहबाज शरीफ के लिए 2022 जैसी राजनीतिक चुनौती बन सकती है।
