क्या ईरान के खिलाफ अमेरिका की सैन्य रणनीति में होगा बड़ा बदलाव?
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर से बढ़ गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि तेहरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए सहमत नहीं होता, तो अगले सप्ताह उसके लिए स्थिति 'बहुत खराब' हो सकती है। यह बयान उस समय आया है जब व्हाइट हाउस ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को और तेज करने की योजना बना रहा है।
व्हाइट हाउस की नई रणनीति
'एक्सियोस' की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने बुधवार को सिचुएशन रूम में एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में अधिकारियों के साथ ईरान पर सैन्य दबाव बढ़ाने के विकल्पों पर चर्चा की गई। बैठक का उद्देश्य ईरानी शासन का संकल्प तोड़ना और उसे बातचीत की मेज पर लाना था।
ट्रंप एक 'व्यापक सैन्य हमले' के पक्षधर हैं। अब तक अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास समुद्री सुरक्षा और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया था, लेकिन नई योजना में इसका दायरा काफी बढ़ सकता है।
संभावित हमलों के ठिकाने
पिछले चार दिनों में अमेरिका ने ईरान के वायु रक्षा सिस्टम, रडार, एंटी-शिप मिसाइल साइट और ड्रोन सुविधाओं पर हमले किए हैं। इसके साथ ही ईरान के बंदरगाहों की नौसैनिक घेराबंदी भी शुरू कर दी गई है। ट्रंप ने मंगलवार को ईरान के 'पिकएक्स माउंटेन' पर हमले का संकेत दिया, जो एक भूमिगत परमाणु स्थल है।
उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह से नहीं खोलता, तो 'एक ज़बरदस्त हमला' होगा। रिपोर्टों के अनुसार, अगले चरण में बिजली संयंत्रों, पुलों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया जा सकता है।
दिन में भी शुरू हुए हवाई हमले
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि उसने बुधवार को दिन के उजाले में भी ईरान के खिलाफ हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। पहले ये हमले केवल रात में होते थे। कमांड का कहना है कि इसका उद्देश्य उन सैन्य क्षमताओं को खत्म करना है जिनका उपयोग ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारी जहाजों पर हमले के लिए कर रहा है।
युद्धविराम के बाद नया चरण
अमेरिका और ईरान के बीच अप्रैल में एक अंतरिम समझौता हुआ था, जो लगभग 90 दिनों तक चला। लेकिन अब वह समाप्त हो चुका है। इसी के बाद अमेरिका ने अपने अभियान का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि अमेरिकी वार्ताकारों ने तेहरान को दो विकल्प दिए हैं - या तो समझौता करो, या 'तुम्हारे पास कुछ नहीं बचेगा।'
कुल मिलाकर, वाशिंगटन दबाव की रणनीति पर काम कर रहा है। सैन्य हमलों की आवृत्ति और दायरा दोनों बढ़ाए जा रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि क्या ईरान बातचीत के लिए सहमत होता है या फिर टकराव और बढ़ता है।
