क्या ईरानी नेताओं की UN महासभा में उपस्थिति से बढ़ेगी कूटनीतिक बातचीत की संभावना?
ईरान के अधिकारियों को मिली UN महासभा में शामिल होने की अनुमति
नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान के प्रमुख नेताओं को न्यूयॉर्क में आयोजित होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने की अनुमति दी है। यह निर्णय उस समय लिया गया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिकी विदेश विभाग ने बताया कि मेज़बान देश के नाते, अमेरिका अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल को वीजा प्रदान करेगा।
ईरान के राष्ट्रपति और विदेश मंत्री को मिली वीजा
सूत्रों के अनुसार, वीजा प्राप्त करने वालों में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची शामिल हैं। ये दोनों नेता संयुक्त राष्ट्र महासभा में ईरान का पक्ष प्रस्तुत करेंगे। यह कदम संघर्ष के बीच बातचीत की संभावनाओं को बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इज़रायल द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालिया संघर्ष शुरू हुआ था। इसके जवाब में, ईरान ने इजरायल और खाड़ी देशों पर हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने स्थित हैं। तब से दोनों देशों के बीच बातचीत का सिलसिला जारी है, लेकिन तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं मिले हैं।
यात्रा पर प्रतिबंध जारी
अमेरिकी विदेश विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पर यात्रा संबंधी प्रतिबंध लागू रहेंगे। उनकी आवाजाही केवल संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, ईरान के मिशन, राजदूत के आवास और जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट तक सीमित होगी। इसके अलावा, लग्जरी सामान और अन्य वस्तुओं की खरीद पर भी रोक जारी रहेगी।
1947 के संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय समझौते के अनुसार, अमेरिका की जिम्मेदारी है कि वह विदेशी राजनयिकों को संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचने की सुविधा प्रदान करे। हालांकि, सुरक्षा और विदेश नीति के कारण वीजा देने से इनकार करने का अधिकार भी अमेरिका के पास है। इस बार ईरानी प्रतिनिधिमंडल को अनुमति देने का निर्णय ऐसे समय में लिया गया है जब एक दिन पहले अमेरिका ने फिलिस्तीनी अधिकारियों को प्रवेश से मना कर दिया था।
कुल मिलाकर, ईरानी राष्ट्रपति और विदेश मंत्री का अमेरिका जाना इस बात का संकेत है कि युद्ध के बीच भी कूटनीतिक बातचीत की संभावनाएं बनी हुई हैं। हालांकि, प्रतिबंध और सीमाएं बरकरार हैं, लेकिन संयुक्त राष्ट्र महासभा में उनकी उपस्थिति से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संवाद का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।
