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क्या डोनाल्ड ट्रंप और किम जोंग उन की मुलाकात होगी? जानें उत्तर कोरिया का कड़ा रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मुलाकात की इच्छा जताई है, लेकिन किम की बहन किम यो जोंग ने बातचीत के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। जानें इस स्थिति का क्या मतलब है और उत्तर कोरिया की अमेरिका से क्या अपेक्षाएं हैं। क्या दोनों नेताओं के बीच फिर से बातचीत होगी? इस लेख में जानें सभी महत्वपूर्ण पहलू।
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ट्रंप की किम जोंग उन से मुलाकात की कोशिश


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन से मिलने की योजना बना रहे हैं। ट्रंप ने इस वर्ष किम से मुलाकात की इच्छा जताई है और कहा है कि दोनों के बीच संबंध अभी भी सकारात्मक हैं। हालांकि, प्योंगयांग से आई हालिया प्रतिक्रिया ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस मुलाकात के लिए रास्ता आसान नहीं होगा। किम की बहन, किम यो जोंग ने अमेरिका के साथ बातचीत के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि भले ही ट्रंप और किम के बीच व्यक्तिगत संबंध अच्छे हों, लेकिन इससे उत्तर कोरिया की सुरक्षा और सैन्य नीति में कोई बदलाव नहीं आएगा। उन्होंने अमेरिका की वर्तमान नीतियों को उत्तर कोरिया के खिलाफ बताया।


इस सप्ताह ट्रंप ने अमेरिका और दक्षिण कोरिया के बीच होने वाले संयुक्त सैन्य अभ्यास को कम करने का निर्णय लिया था, जिसे उन्होंने उत्तर कोरिया के लिए शत्रुतापूर्ण बताया। इसके बाद, ट्रंप ने उम्मीद जताई कि इस वर्ष उनकी किम से फिर मुलाकात हो सकती है। अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि वह बिना किसी शर्त के उत्तर कोरिया के साथ बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है।


हालांकि, किम यो जोंग के बयान से यह स्पष्ट है कि प्योंगयांग केवल सैन्य अभ्यास में कमी को पर्याप्त कदम नहीं मानता। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका इसे सद्भावना का संकेत मानता है, तो उसे वैसा जवाब नहीं मिलेगा जैसा वह चाहता है। उनका यह भी कहना है कि हाल में ट्रंप और किम के बीच कोई बातचीत नहीं हुई है। इसी बीच, दक्षिण कोरियाई सेना ने बताया कि उत्तर कोरिया ने अपने पूर्वी तट से लगभग 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिसे विशेषज्ञ अमेरिका और दक्षिण कोरिया की सैन्य गतिविधियों के खिलाफ उत्तर कोरिया का शक्ति प्रदर्शन मानते हैं.


प्योंगयांग की अमेरिका से बड़ी रियायत की मांग

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया बातचीत की संभावनाओं को पूरी तरह समाप्त नहीं करना चाहता, लेकिन वह अमेरिका से बड़े बदलाव की उम्मीद कर रहा है। इसमें उत्तर कोरिया के खिलाफ अमेरिकी नीतियों में नरमी और उसके परमाणु हथियारों के प्रति अमेरिका के रुख में बदलाव शामिल हो सकता है।


ट्रंप और किम के बीच 2018 और 2019 में ऐतिहासिक बैठकें हुई थीं, जिनसे परमाणु मुद्दे पर समझौते की उम्मीद जगी थी, लेकिन बातचीत किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। अब दोनों नेताओं के बीच दोबारा मुलाकात की संभावना दिखाई दे रही है, लेकिन किम यो जोंग के ताजा बयान से यह स्पष्ट है कि उत्तर कोरिया इस बार अपनी मांगों और शर्तों को नजरअंदाज करके बातचीत आगे बढ़ाने के मूड में नहीं है।