क्या डोनाल्ड ट्रंप की मुश्किलें बढ़ रही हैं? जानें रिपब्लिकन पार्टी में उठ रहे विरोध के स्वर
ट्रंप की चुनौतियाँ बढ़ती जा रही हैं
नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को आगामी मध्यावधि चुनावों के चलते बढ़ते राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है। अब तक उनकी नीतियों का खुलकर विरोध करने से बचने वाले रिपब्लिकन पार्टी के सांसद और नेता अब अपनी ही सरकार के खिलाफ बगावती रुख अपनाने लगे हैं। अमेरिकी संसद के दोनों सदनों में पार्टी के भीतर से उठ रही ये आवाजें ट्रंप प्रशासन के लिए एक गंभीर राजनीतिक चुनौती बन चुकी हैं।
ट्रंप को मिले अहम झटके
हाल के हफ्तों में, सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में रिपब्लिकन पार्टी के विभिन्न गुटों ने ट्रंप की नीतियों को कड़ा झटका दिया है। सांसदों ने न केवल ईरान के प्रति ट्रंप की आक्रामक नीति की आलोचना की है, बल्कि व्हाइट हाउस के एक अरब डॉलर के फंडिंग प्रस्ताव को भी खारिज कर दिया है।
ट्रंप की मजबूरी
सांसदों के विरोध के चलते ट्रंप को अपने 1.8 अरब डॉलर के हथियार-विरोधी फंड से पीछे हटने के लिए मजबूर होना पड़ा है। इसके अलावा, घरेलू जासूसी से संबंधित उनके प्रस्तावित कानून को भी फिलहाल रोक दिया गया है।
यूक्रेन और रूस के मुद्दे पर टकराव
गुरुवार को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स ने यूक्रेन को सैन्य और वित्तीय सहायता देने के साथ-साथ रूस पर नए प्रतिबंध लगाने का एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित किया। ट्रंप इस कदम के खिलाफ हैं और कयास लगाए जा रहे हैं कि वे इस बिल को रोकने के लिए अपने विशेषाधिकार का उपयोग कर सकते हैं।
ट्रंप की योजनाओं में बाधा
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी के भीतर असहमति जताने वाले नेताओं का यह समूह, जिन्हें ट्रंप ने पहले पदों से हटाया था, आगामी चुनावों तक ट्रंप की महत्वाकांक्षी योजनाओं के लिए एक बड़ा रोड़ा बन सकता है।
डेमोक्रेट्स का विरोध
इस घटनाक्रम पर डेमोक्रेट्स का रुख अलग है। उन्होंने रिपब्लिकन पार्टी के भीतर किसी भी बड़ी 'बगावत' की संभावना को खारिज किया है। उनका कहना है कि ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह साबित करे कि पूरी रिपब्लिकन पार्टी ट्रंप का विरोध करने के लिए एकजुट है।
सीनेटर जॉन फेटरमैन की टिप्पणी
डेमोक्रेट सीनेटर जॉन फेटरमैन ने कहा कि जो लोग आज ट्रंप से अलग हो रहे हैं, उन्हें खुद ट्रंप ने पहले ही व्यवस्था से बाहर का रास्ता दिखाया था। वहीं, एक वरिष्ठ व्हाइट हाउस अधिकारी ने इस नाराजगी को चुनावी राजनीति का हिस्सा बताया है, जिसका उद्देश्य मतदाताओं के बीच अपनी स्वतंत्र छवि पेश करना है।
