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क्या पाकिस्तान को BRICS में मिलेगी जगह? जानें भारत के विरोध की वजह

पाकिस्तान ने BRICS में सदस्यता के लिए आवेदन किया है, लेकिन भारत का विरोध उसकी राह में सबसे बड़ी बाधा बन गया है। इस्लामाबाद ने 2023 में BRICS में शामिल होने की इच्छा जताई थी और विभिन्न देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश की है। आर्थिक दबाव और विदेशी सहायता पर निर्भरता के चलते पाकिस्तान के लिए BRICS का हिस्सा बनना महत्वपूर्ण है। जानें इस मुद्दे के पीछे की जटिलताएँ और भारत की भूमिका।
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पाकिस्तान की BRICS में शामिल होने की कोशिश


नई दिल्ली: पाकिस्तान ने BRICS का हिस्सा बनने के लिए लंबे समय से प्रयास किए हैं, लेकिन अब तक उसे सफलता नहीं मिली है। इस्लामाबाद ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए औपचारिक आवेदन प्रस्तुत किया था। इसके बाद, पाकिस्तान ने विभिन्न सदस्य देशों से समर्थन जुटाने की कोशिश की, लेकिन भारत का विरोध एक बड़ी बाधा बना हुआ है।


2023 में आवेदन की प्रक्रिया

पाकिस्तान ने नवंबर 2023 में BRICS में शामिल होने की अपनी इच्छा को सार्वजनिक किया। उस समय, उसके विदेश मंत्रालय ने इस समूह को विकासशील देशों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि सदस्य बनने के बाद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।


पाकिस्तान ने सदस्य देशों से समर्थन प्राप्त करने के लिए राजनयिक प्रयास भी किए। रूस और चीन के साथ उसके संबंधों के कारण, इस्लामाबाद को इन देशों से समर्थन मिलने की उम्मीद थी।


आर्थिक चुनौतियों के बीच BRICS की ओर ध्यान

पाकिस्तान की BRICS में शामिल होने की कोशिश को उसकी आर्थिक जरूरतों से भी जोड़ा जा रहा है। देश लंबे समय से आर्थिक दबाव और विदेशी वित्तीय सहायता पर निर्भरता जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है।


BRICS से जुड़ा New Development Bank भी पाकिस्तान के लिए एक आकर्षण का केंद्र है। रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तान ने इस बैंक में लगभग 580 मिलियन डॉलर की हिस्सेदारी खरीदी है, जिसका उद्देश्य वित्तीय विकल्पों को बढ़ाना और पारंपरिक संस्थानों पर निर्भरता को कम करना है।


भारत का विरोध: सबसे बड़ी बाधा

BRICS में नए सदस्यों को शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों की सहमति आवश्यक होती है। इस संदर्भ में, भारत की आपत्ति पाकिस्तान की सदस्यता की राह में एक महत्वपूर्ण रुकावट बन गई है। पाकिस्तान की कोशिशों के बावजूद, नई दिल्ली की असहमति के कारण उसकी सदस्यता आगे नहीं बढ़ सकी है। यही कारण है कि 2023 में आवेदन करने के वर्षों बाद भी पाकिस्तान BRICS का पूर्ण सदस्य नहीं बन पाया है।


BRICS का बढ़ता प्रभाव

BRICS के विस्तार के साथ इसका वैश्विक प्रभाव भी बढ़ा है। इस समूह का हिस्सा बनना पाकिस्तान के लिए आर्थिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, भारत की सहमति के बिना उसकी सदस्यता प्राप्त करना आसान नहीं दिखता।