क्या बेंजामिन नेतन्याहू फिर से बनेंगे इजरायल के प्रधानमंत्री? जानें संभावनाएं
नेतन्याहू का नया राजनीतिक दांव
नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चुनावी सर्वेक्षणों में पिछड़ने के बाद सत्ता में बने रहने के लिए नए उपायों पर विचार कर रहे हैं। चर्चा है कि वे अपने प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के साथ एकता सरकार बनाने और रोटेशन डील के माध्यम से फिर से प्रधानमंत्री बनने की योजना बना रहे हैं। यह वही रणनीति है, जिसे बिहार में नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव ने अपनाया था, जहां नीतीश ने बाद में समझौता तोड़कर खुद सत्ता संभाल ली थी।
क्या है पूरा मामला?
द वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू के सहयोगी और लिकुड पार्टी के नेता आइजेनकोट की याशर पार्टी के साथ गठबंधन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रतिनिधियों ने भी इस मुद्दे पर इजरायली अधिकारियों से बातचीत की है, लेकिन आइजेनकोट ने सार्वजनिक रूप से नेतन्याहू के साथ सरकार बनाने से इनकार किया है।
सर्वे में बहुमत की कमी
23 अक्टूबर को जेरूसलम पोस्ट में प्रकाशित N12 और चैनल 13 के सर्वेक्षणों के अनुसार, याशर को N12 में 23 और लिकुड को 19 सीटें मिलीं, जबकि चैनल 13 में याशर को 20 और लिकुड को 19 सीटें मिलीं। 120 सदस्यीय नेसेट में बहुमत के लिए 61 सीटों की आवश्यकता है, जो किसी भी गुट को प्राप्त होती नहीं दिख रही। N12 के अनुसार, आइजेनकोट के विपक्षी गुट को 55 और लिकुड को 51 सीटें मिल रही हैं, जबकि चैनल 13 ने 52 और 49 सीटों का अनुमान लगाया है। ऐसे में गठबंधन या एकता सरकार ही एकमात्र विकल्प है।
नेतन्याहू का नरम रुख
रिपोर्ट के अनुसार, नेतन्याहू अमेरिकी और यूरोपीय अधिकारियों से कह रहे हैं कि आइजेनकोट के साथ वे एक उदार सरकार बना सकते हैं, जिसमें वे अपने कट्टर दक्षिणपंथी सहयोगियों को बाहर कर सकते हैं। उनका तर्क है कि उनकी सरकार ईरान के खिलाफ अमेरिका की सबसे मजबूत सहयोगी होगी।
ट्रंप का समर्थन
डोनाल्ड ट्रंप ने 18 अक्टूबर को नेतन्याहू को 'महान योद्धा प्रधानमंत्री' कहा और 25 अक्टूबर को इजरायली राष्ट्रपति पर दबाव डाला कि वे नेतन्याहू को भ्रष्टाचार के आरोपों में माफ कर दें। लिकुड के एक अधिकारी ने कहा कि ट्रंप एक स्थिर सरकार चाहते हैं और नेतन्याहू उनके लिए सही विकल्प हैं। हालांकि, ट्रंप प्रशासन में इस पर मतभेद हैं, क्योंकि कई लोग नेतन्याहू के पुराने रिकॉर्ड पर भरोसा नहीं करते।
भारत का रोटेशन डील का इतिहास
भारत में रोटेशन डील का एक लंबा इतिहास रहा है। बिहार में 2022 में नीतीश और तेजस्वी ने समझौता किया था कि बाद में तेजस्वी मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन जनवरी 2024 में नीतीश ने गठबंधन तोड़कर भाजपा के साथ सरकार बना ली। कर्नाटक में 2006 में कुमारस्वामी और येदियुरप्पा के बीच 20-20 महीने का फॉर्मूला भी टूट गया था। इजरायल में 2020 में बेनी गैंट्ज के साथ भी नेतन्याहू ने रोटेशन डील तोड़ी थी।
अब सवाल यह है कि क्या आइजेनकोट नेतन्याहू पर भरोसा करेंगे? पोलस्टर मेनाचेम लजार के अनुसार, नेतन्याहू पर भरोसा नहीं किया जा सकता और उनके साथ गठबंधन करना आइजेनकोट के लिए राजनीतिक आत्महत्या होगा।
