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क्या यमन में एआई का इस्तेमाल मिसाइल निर्माण के लिए हो रहा है? एंथ्रोपिक की नई रिपोर्ट में खुलासा

एंथ्रोपिक की हालिया रिपोर्ट में यमन में ईरान समर्थित हूथी समूह द्वारा एआई का संभावित दुरुपयोग उजागर किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि समूह ने निर्देशित मिसाइलों के लिए सॉफ्टवेयर विकसित करने में एआई चैटबॉट क्लाउड का उपयोग किया। इसके अलावा, रिपोर्ट में जैविक हथियारों के शोध और अन्य सुरक्षा खतरों का भी उल्लेख किया गया है। क्या एआई का दुरुपयोग वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा बन रहा है? जानें पूरी कहानी में।
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नई दिल्ली में एआई के संभावित खतरों पर रिपोर्ट


नई दिल्ली: कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में नई संभावनाएं उभर रही हैं, लेकिन इसके दुरुपयोग के खतरे भी सामने आ रहे हैं। एंथ्रोपिक द्वारा जारी एक नई रिपोर्ट में बताया गया है कि यमन में ईरान समर्थित हूथी समूह ने एंथ्रोपिक के एआई चैटबॉट क्लाउड का उपयोग करके निर्देशित मिसाइलों के लिए सॉफ्टवेयर विकसित किया हो सकता है। हालांकि, कंपनी ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि क्या इस समूह ने एआई की सहायता से तैयार हथियारों को सफलतापूर्वक तैनात किया है।


गुरुवार को एंथ्रोपिक ने 154 पन्नों की एक रिपोर्ट जारी की, जिसमें बताया गया कि विभिन्न सरकारों, आपराधिक संगठनों और अन्य समूहों ने उसके एआई मॉडल का दुरुपयोग करने की कोशिश की है। इसमें जैविक हथियारों के शोध, जासूसी, दुष्प्रचार और पारंपरिक हथियारों के विकास जैसी गतिविधियों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट में एक यमन स्थित हथियार इंजीनियरिंग समूह का भी जिक्र है, जिसका नाम सीधे तौर पर नहीं बताया गया, लेकिन जानकारी हूतियों से मेल खाती है।


कंपनी के अनुसार, इस समूह ने क्लाउड का उपयोग करके मार्गदर्शन, नेविगेशन और नियंत्रण (जीएनसी) सॉफ्टवेयर विकसित करने का प्रयास किया। जीएनसी सॉफ्टवेयर उड़ने वाले वाहनों को दिशा देने, उनकी स्थिति का अनुमान लगाने और उड़ान के दौरान उन्हें नियंत्रित करने में मदद करता है।


मिसाइल कार्यक्रमों की जानकारी

तीन प्रकार के मिसाइल कार्यक्रम


एंथ्रोपिक के अनुसार, उत्तरी यमन में एक हथियार इंजीनियरिंग सेल तीन अलग-अलग मिसाइल कार्यक्रमों पर कार्यरत था। इनमें एक गाइडेड रॉकेट शामिल था, जिसमें बाजार में उपलब्ध फोन जैसे फ्लाइट कंप्यूटर और लक्ष्य तक पहुंचने वाली तकनीक का उपयोग किया गया। दूसरा कार्यक्रम एक बहु-चरणीय बैलिस्टिक मिसाइल से संबंधित था, जिसकी मारक क्षमता 2,000 किलोमीटर से अधिक बताई गई। तीसरे कार्यक्रम को 'आर2000' सेट के रूप में नामित किया गया, जिसमें कई मिसाइल रूप शामिल थे, जिनमें हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन से जुड़ा एक संस्करण भी था।


कंपनी ने बताया कि क्लाउड का उपयोग खुले स्रोत वाले ऑटोपायलट को फ्लाइट कंप्यूटर के साथ जोड़ने के लिए किया गया। एआई ने नियंत्रण और स्थिति का अनुमान लगाने वाले सॉफ्टवेयर विकसित करने, सेटिंग बदलने, फर्मवेयर तैयार करने और उड़ान से संबंधित सिमुलेशन में सहायता की।


सुरक्षा उपायों को चकमा देने की कोशिश

सुरक्षा उपायों को चकमा देने की कोशिश


रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेटरों ने क्लाउड के कई सत्र एक साथ चलाए। हर सत्र को अलग कार्य सौंपा गया था। कुछ में कोड तैयार किया गया, जबकि अन्य में शोध किया गया और तैयार किए गए कार्य की जांच की गई। एंथ्रोपिक ने कहा कि उसके सुरक्षा सिस्टम ने कई अनुरोधों को रोक दिया, लेकिन कुछ गतिविधियां इन उपायों को पार करने में सफल रहीं। इसके लिए असली लक्ष्य और सॉफ्टवेयर के उद्देश्य को छिपाने के तरीके अपनाए गए।


रिपोर्ट के अनुसार, एक निर्देशित रॉकेट के परीक्षण में असफलता के कुछ घंटों बाद, समूह ने फिर से क्लाउड का उपयोग कर समस्या का समाधान खोजने का प्रयास किया। एंथ्रोपिक ने बाद में इस गतिविधि की पहचान की और संबंधित खातों पर रोक लगाई।


एआई के दुरुपयोग के अन्य मामले

एआई के गलत इस्तेमाल के कई मामले


यमन का मामला अकेला नहीं है। एंथ्रोपिक ने पारंपरिक हथियारों से जुड़े छह अन्य मामलों की पहचान की है, जिनमें चीन और रूस से जुड़े व्यक्तियों द्वारा आग्नेयास्त्रों, मिसाइलों, सशस्त्र ड्रोन और अन्य हथियारों पर काम करने के प्रयास शामिल हैं। रिपोर्ट में साइबर हमलों, निगरानी और प्रचार गतिविधियों में भी क्लाउड के उपयोग का उल्लेख किया गया है।


कंपनी ने जैविक अनुसंधान से जुड़े पांच मामलों को भी गंभीर बताया, जिसमें एआई मॉडल का उपयोग ऐसे शोध के लिए किया गया जो संभावित रूप से जैविक हथियारों के विकास में मदद कर सकता था। हालांकि, एंथ्रोपिक ने संबंधित व्यक्तियों या संस्थानों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।


भविष्य की चुनौतियाँ

भविष्य की चुनौतियाँ


कंपनी का कहना है कि ऐसे मामले सामान्य नहीं हैं, लेकिन ये एआई के दुरुपयोग के खतरे को समझने में मदद करते हैं। यह रिपोर्ट मानवविज्ञान शोधकर्ता जैकब कॉक्सन के इस्तीफे के कुछ दिनों बाद आई है, जिन्होंने एआई की तेजी से बढ़ती क्षमता को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि भविष्य में इसके विकास को नियंत्रित करना इंसानों के लिए मुश्किल हो सकता है।