क्या रूस-यूक्रेन युद्ध में ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमत हुए हैं? ट्रंप का बड़ा दावा
ट्रंप का दावा: ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमति
नई दिल्ली: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे संघर्ष को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। ट्रंप का कहना है कि दोनों देश अब एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों को निशाना नहीं बनाने पर सहमत हो गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यूक्रेन रूसी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले बंद करेगा और रूस भी इसी तरह की कार्रवाई से पीछे हटेगा। हालांकि, इस कथित सहमति की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि ईंधन की कीमतों में हालिया वृद्धि का कारण केवल ईरान में चल रहा युद्ध नहीं है। उनके अनुसार, रूस और यूक्रेन के बीच ऊर्जा ढांचे पर हो रहे हमलों का भी बाजार पर प्रभाव पड़ा है।
रविवार को ट्रंप ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से रूसी तेल रिफाइनरियों और डीजल उत्पादन से जुड़े ठिकानों पर हमले रोकने का अनुरोध किया था। उनका तर्क था कि इन हमलों के कारण ईंधन की उपलब्धता पर असर पड़ रहा है। यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका में डीजल की औसत कीमत छह डॉलर प्रति गैलन से ऊपर पहुंच गई थी। ट्रंप ने इस मुद्दे पर भी चिंता व्यक्त की।
यूक्रेन के हमले और रूस का तेल उद्योग
यूक्रेन पिछले कुछ महीनों से लंबी दूरी के हथियारों का उपयोग करके रूस के तेल और गैस से जुड़े ठिकानों पर हमले कर रहा है। इन हमलों के कारण रूस में कुछ क्षेत्रों में ईंधन की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसके चलते मॉस्को ने जुलाई में डीजल के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इससे वैश्विक ईंधन बाजार में पहले से मौजूद दबाव और बढ़ गया है।
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय ईंधन संकट के लिए केवल रूस-यूक्रेन युद्ध को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। ईरान से जुड़े संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य में तेल की आवाजाही में बाधा ने भी वैश्विक सप्लाई पर असर डाला है।
अमेरिका में ईंधन की कीमतों पर चिंता
अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतें और उपलब्धता एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनती जा रही हैं। इसी दौरान एक पत्रकार ने ट्रंप से जेलेंस्की के साथ उनकी बातचीत के बारे में सवाल किया। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने जेलेंस्की से रूस में डीजल ईंधन से जुड़े केंद्रों पर हमले बंद करने का अनुरोध किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसे हमले केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं रहते, बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है।
