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क्या है ट्रंप की विवादित मूर्ति का सच? जानें इस अनोखे कला के पीछे की कहानी

डोनाल्ड ट्रंप की एक नई नग्न मूर्ति ने फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में विवाद खड़ा कर दिया है। इस मूर्ति को 23 कैरेट सोने से बनाया गया है और इसे 'द ऑरेंज प्लेग' नाम दिया गया है। कलाकार जेन्स गाल्शियोट ने इसे ट्रंप की नीतियों पर व्यंग्य के रूप में प्रस्तुत किया है। मूर्ति में ट्रंप को गोल्फ क्लब और न्याय का तराजू पकड़े हुए दिखाया गया है, जबकि नीचे एक थका हुआ व्यक्ति उनकी आकृति को उठाए हुए है। सोशल मीडिया पर इस मूर्ति को लेकर बहस छिड़ गई है, जिसमें कुछ लोग इसे समर्थन दे रहे हैं, जबकि अन्य इसकी आलोचना कर रहे हैं।
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नई दिल्ली में ट्रंप की अनोखी मूर्ति का अनावरण


नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर चर्चा का विषय बने हैं। इस बार कारण है फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद के निकट स्थापित उनकी एक विवादास्पद मूर्ति। इस मूर्ति में ट्रंप को नग्न रूप में दर्शाया गया है, जो उनकी नीतियों पर एक व्यंग्य है। यह मूर्ति 23 कैरेट सोने की परत से बनी है और इसकी ऊंचाई लगभग आठ फीट है। इसे डेनमार्क के कलाकार जेन्स गाल्शियोट ने तैयार किया है और इसका नाम 'द ऑरेंज प्लेग' रखा गया है। मूर्ति के सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसकी तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो गए हैं।


गोल्फ क्लब और न्याय का तराजू

इस कलाकृति में ट्रंप को एक हाथ में गोल्फ क्लब और दूसरे हाथ में न्याय का तराजू पकड़े हुए दिखाया गया है। मूर्ति के नीचे एक थका हुआ व्यक्ति है, जो ट्रंप की पूरी आकृति को अपने कंधों पर उठाए हुए है। इसके नीचे एक ग्लोब जैसी आकृति भी बनाई गई है।


मूर्ति के आधार पर अंग्रेजी में 'द किंग ऑफ इनजस्टिस' लिखा गया है, जिसका अर्थ है 'अन्याय का राजा'। कलाकार ने इस दृश्य के माध्यम से ट्रंप को आम लोगों और दुनिया पर एक बोझ के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।


ट्रंप की नीतियों पर व्यंग्य

जेन्स गाल्शियोट ने इस मूर्ति को राजनीतिक और व्यंग्यात्मक विरोध का एक साधन बताया है। उनका कहना है कि इस कलाकृति के माध्यम से ट्रंप की विदेश नीति, पर्यावरण और जलवायु से संबंधित उनके दृष्टिकोण पर सवाल उठाए गए हैं।


कलाकार के अनुसार, ट्रंप अंतरराष्ट्रीय नियमों, लोकतांत्रिक मूल्यों और जलवायु संकट से निपटने के प्रयासों के लिए खतरा हैं। इसलिए, उन्होंने इस मूर्ति को इन मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने का एक साधन बनाया है।


सोशल मीडिया पर बहस का विषय

मूर्ति का वीडियो इंटरनेट पर आते ही लोगों के बीच बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक व्यंग्य मानते हुए समर्थन किया, जबकि कई यूजर्स ने कलाकार की शैली की आलोचना की। डेनमार्क के MEP पेर क्लॉसन ने भी इस इंस्टॉलेशन का समर्थन किया है। बताया जा रहा है कि मूर्ति गुरुवार तक स्ट्रासबर्ग में रहेगी और इसके बाद इसे COP31 जलवायु सम्मेलन में प्रदर्शित करने की योजना है। कलाकार सम्मेलन में इसकी छोटी 3D प्रिंटेड प्रतिकृतियां भी बांट सकते हैं।