क्या है बलूचिस्तान की नाबालिग कार्यकर्ता फराह बलूच की भारत से मदद की गुहार?
फराह बलूच की अपील
नई दिल्ली: बलूचिस्तान की एक युवा कार्यकर्ता, फराह बलूच, ने भारत से सहायता की मांग करते हुए एक वीडियो साझा किया है, जिसमें वह अपनी मां के साथ तिरंगा लहराते हुए नजर आ रही हैं। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। 14 वर्षीय मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि पाकिस्तान में शहबाज शरीफ की सरकार और सेना प्रमुख असीम मुनीर के तहत बलूच लोगों पर अत्याचार हो रहा है। उसने भारतीय नागरिकों और वैश्विक समुदाय से अपील की कि वे बलूचिस्तान की आवाज बनें।
वीडियो में फराह का संदेश
फराह ने वीडियो में कहा, "मैं फराह बलूच, कब्जे वाले बलूचिस्तान की बेटी, आपसे गुजारिश करती हूं कि हमारी आवाज बनें। हिंदुस्तान, आपकी मदद बलूचिस्तान के बेजुबान लोगों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।" उसने लोगों से चुप्पी तोड़ने की अपील की।
Nameste Bahraat Mata, Hindustan.
— FARAH BALOCH (@MBaloch8mda) September 27, 2026
Today, I Farah Baloch Daughter Of Occupied Balochistan with my mother request to each and every citizen of to be our voice and support the the people of Balochistan, Hindustan your voice, your support to the voiceless people of Balochistan… pic.twitter.com/7dwKesKnfu
बलूचिस्तान की स्थिति
फराह की यह अपील उस समय आई है जब बलूचिस्तान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। वहां हिंसक घटनाएं, विरोध प्रदर्शन और सेना के खिलाफ असंतोष की खबरें आम हैं। बलूच कार्यकर्ता लंबे समय से आरोप लगाते आ रहे हैं कि पाकिस्तानी सेना नागरिकों को जबरन गायब कर रही है और राजनीतिक आवाजों को दबा रही है।
भारत से अपील का कारण
भारत सरकार ने बलूचिस्तान के मुद्दे पर संतुलित रुख अपनाया है, लेकिन कई बार भारतीय अधिकारियों ने पाकिस्तान से बलूच लोगों की लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों की मांगों पर ध्यान देने का आग्रह किया है। फराह का मानना है कि यदि भारत इस मुद्दे पर खुलकर बोलेगा, तो अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान भी बलूच लोगों की समस्याओं की ओर जाएगा।
बलूचिस्तान, जो पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, गैस, सोना, और तांबा जैसे खनिजों से भरा हुआ है, फिर भी इसे देश का सबसे पिछड़ा क्षेत्र माना जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उनके संसाधनों का लाभ इस्लामाबाद और अन्य प्रांतों को मिलता है, जबकि बलूच लोग गरीबी में जीने को मजबूर हैं।
स्थानीय लोगों का गुस्सा
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे और ग्वादर बंदरगाह जैसी परियोजनाओं के कारण स्थानीय लोगों में गुस्सा बढ़ रहा है। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं से उन्हें लाभ कम और विस्थापन ज्यादा हो रहा है। इसी असंतोष के चलते बलूच लिबरेशन आर्मी जैसे संगठन अधिक स्वायत्तता और कभी-कभी पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को लेकर सुरक्षा बलों पर हमले करते रहे हैं।
