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ग़ाज़ा संघर्ष: अमेरिका की नई पहल और उसके परिणाम

ग़ाज़ा संघर्ष पर अमेरिका की नई 15-सूत्री योजना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इस योजना के तहत हमास को अपने हथियारों को अंतरराष्ट्रीय सत्यापन संस्था को सौंपना है, जबकि इजराइल को ग़ाज़ा से हटना है। हालांकि, इजराइल ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है। जानें इस योजना के पीछे की चुनौतियाँ और भविष्य में क्या हो सकता है।
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ग़ाज़ा के लिए नई योजना का प्रस्ताव

(आदम फार्कहर, यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग) एडिनबर्ग (स्कॉटलैंड), 21 अगस्त - अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ पीस' ने जुलाई के अंत में ग़ाज़ा के लिए एक 15-सूत्री योजना पेश की थी। इस योजना के अनुसार, हमास अपने हथियारों को एक अंतरराष्ट्रीय सत्यापन संस्था को सौंपेगा, जबकि इजराइल ग़ाज़ा से धीरे-धीरे हट जाएगा। हालांकि, इजराइल ने 9 अगस्त को इस प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।


हमास और इजराइल के बीच वार्ता

इसके बाद, अमेरिकी दूत जैरेड कुशनर ने मिस्र के तट पर हमास के प्रतिनिधियों से बातचीत की। फिर वे यरूशलम पहुंचे, जहां उन्होंने अमेरिकी सेना के एक जनरल की निगरानी में हथियारों के हस्तांतरण का प्रस्ताव रखा। यह बदलाव यह दर्शाता है कि जनवरी 2025 से ग़ाज़ा के संबंध में हुए समझौतों में क्या कमी रही है।


समझौतों की कमी

इन समझौतों में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि अनुपालन की पुष्टि कौन करेगा। एडिनबर्ग विश्वविद्यालय के 'पीस एग्रीमेंट डेटाबेस' ने 2025 में ग़ाज़ा संघर्ष विराम प्रक्रिया से संबंधित चार समझौतों को दर्ज किया है। इनमें जनवरी का संघर्ष विराम समझौता, अक्टूबर में हुए समझौतों की श्रृंखला और नवंबर में पारित संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव शामिल हैं।


बंदियों की अदला-बदली और प्रावधान

इन समझौतों में बंधकों और कैदियों की अदला-बदली तथा ग़ाज़ा के लिए एक अंतरिम प्राधिकरण के गठन जैसे मुद्दों पर प्रावधान किए गए थे। लेकिन यह स्पष्ट नहीं था कि उल्लंघन की स्थिति में निर्णय कौन करेगा और प्रक्रिया को फिर से कैसे शुरू किया जाएगा। जनवरी 2025 के चारों समझौतों में सबसे विस्तृत प्रावधान थे।


अंतरराष्ट्रीय गारंटरों की भूमिका

समझौतों में अमेरिका, मिस्र और कतर को गारंटर बनाया गया था, लेकिन उन्हें केवल बातचीत जारी रखने के लिए कहा गया था। कतर के प्रधानमंत्री ने एक फॉलोअप तंत्र की घोषणा की थी, लेकिन इसे समझौते का हिस्सा नहीं बनाया गया। गारंटरों को समस्याओं को दर्ज करने का अधिकार था, लेकिन समझौते को लागू कराने का अधिकार नहीं था।


समझौतों का कार्यान्वयन

दूसरे चरण में इजराइल ने फिर से बमबारी शुरू कर दी। अक्टूबर 2025 में हुए दो समझौतों का उद्देश्य संशोधित शर्तों के तहत प्रक्रिया को फिर से पटरी पर लाना था। अमेरिकी सेना की मध्य कमान द्वारा इजराइल से संचालित एक केंद्र बनाया गया था, जिसका काम सहायता का समन्वय करना और संघर्ष विराम की निगरानी करना था।


संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव

नवंबर में संयुक्त राष्ट्र का प्रस्ताव सबसे महत्वपूर्ण समझौता था, जिसने ट्रंप की ग़ाज़ा शांति योजना का आधिकारिक समर्थन किया। हालांकि, प्रस्ताव में यह नहीं बताया गया कि इस निकाय में कौन शामिल होगा। महिलाओं की भूमिका का भी उल्लेख नहीं किया गया।


नए प्रस्ताव की चुनौतियाँ

पंद्रह सूत्री रूपरेखा का उद्देश्य पिछले समझौतों में मौजूद कुछ विवरणों की कमी को दूर करना था। योजना में एक अंतरराष्ट्रीय सत्यापन समिति का प्रावधान है, लेकिन इजराइली सैनिकों की वापसी के वादे को बदल दिया गया है। 17 अगस्त को 'बोर्ड ऑफ पीस' ने इजराइली प्रधानमंत्री को आश्वस्त किया कि हमास के निरस्त्रीकरण के पूरा होने तक इजराइली सेना ग़ाज़ा से बाहर नहीं जाएगी।


भविष्य की दिशा

इस व्यवस्था में क्षेत्रीय गारंटरों को शामिल करना आवश्यक है। इसके अलावा, ग़ाज़ा के फलस्तीनियों की भूमिका को सुनिश्चित करने के लिए एक शासन व्यवस्था की आवश्यकता है। यदि ऐसा नहीं होता है, तो निरस्त्रीकरण का विवाद सुलझने के बावजूद निर्णय लेने और अनुपालन सुनिश्चित करने में वही कमी फिर से गतिरोध पैदा कर सकती है।