चीन और अमेरिका के बीच ताइवान पर बढ़ता तनाव: शी जिनपिंग की स्पष्ट चेतावनी
शी जिनपिंग और डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात
नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हुई मुलाकात का माहौल सकारात्मक नजर आया। दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर सहमति दिखाई दी, लेकिन ताइवान के मुद्दे पर जिनपिंग ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी। चीन ताइवान के मामले में किसी भी प्रकार का समझौता करने को तैयार नहीं है।
ताइवान पर अमेरिका का रुख
व्हाइट हाउस में हुई चर्चा के दौरान, शी जिनपिंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अमेरिका ताइवान की स्वतंत्रता के खिलाफ अपने रुख पर कायम रहेगा। उन्होंने यह भी बताया कि चीन की राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए उसका दृष्टिकोण हमेशा स्पष्ट रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका ने ताइवान के संबंध में अपनी नीति में किसी भी बड़े बदलाव का संकेत नहीं दिया है।
अमेरिका-चीन के बीच टकराव
हालांकि अमेरिका और चीन के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, फिर भी अमेरिका ताइवान का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय समर्थक और हथियार आपूर्तिकर्ता माना जाता है। ट्रंप ने मई में चीन दौरे के बाद ताइवान को दी जाने वाली लगभग 14 अरब डॉलर की हथियार डील को रोकने का संकेत दिया था, लेकिन उन्होंने चीन को ताइवान में मनमानी करने की अनुमति नहीं दी है। यदि ट्रंप इस मामले में अमेरिकी सरकार की आधिकारिक भाषा में बदलाव करते हैं, तो यह दशकों पुरानी अमेरिकी नीति को पूरी तरह बदल देगा।
ताइवान का ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ताइवान का इतिहास भी काफी रोचक है। किंग राजवंश ने 1684 में इसे फुजियान प्रांत का हिस्सा बनाया, और 1895 में जापान से हारने के बाद यह जापान का उपनिवेश बन गया। 1945 में दूसरे विश्व युद्ध के अंत पर इसे 'रिपब्लिक ऑफ चाइना' को सौंपा गया, और 1949 में माओ जेडोंग से हारने के बाद यही सरकार ताइवान चली गई। तब से माओ की 'पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना' खुद को पूरे चीन की एकमात्र वैध सरकार मानती रही है, जिसमें ताइवान भी शामिल है।
क्या ताइवान वास्तव में स्वतंत्र है?
ताइवान के नागरिक अपने नेताओं का चुनाव करते हैं और वहां की सरकार अपनी सेना, मुद्रा और पासपोर्ट के साथ स्वतंत्र रूप से कार्य करती है। यही कारण है कि भले ही अधिकांश देशों ने इसे औपचारिक मान्यता नहीं दी हो, यह वास्तव में एक स्वतंत्र क्षेत्र की तरह कार्य करता है। अमेरिका ने 1979 से 'वन चाइना' नीति अपनाई है, जिसका अर्थ है कि वह ताइवान को अलग देश मानने में कोई सीधा रुख नहीं अपनाता, लेकिन कानूनी रूप से उसे हथियार और सुरक्षा सहायता देने का अधिकार रखता है।
