चीन का लोप नूर: अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों का नया केंद्र
चीन की सैन्य ताकत का विस्तार
चीन केवल भूमि और समुद्र में अपनी सैन्य शक्ति को नहीं बढ़ा रहा है, बल्कि वह आसमान में भी अपनी अगली पीढ़ी की वर्चस्व स्थापित करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिनजियांग के दुर्गम रेगिस्तान में लोप नूर को तेजी से विकसित किया जा रहा है, जिससे बीजिंग एक विशाल फ्लाइट-टेस्ट कॉम्प्लेक्स तैयार कर रहा है। यह केंद्र भविष्य में चीन के छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों और संभावित स्टील्थ बॉम्बर कार्यक्रमों का मुख्य स्थान बन सकता है। यह अमेरिका को सीधी चुनौती देने वाली चीन की एयर-पावर महत्वाकांक्षा का एक नया अध्याय है।
लोप नूर का विस्तार
सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर आई रिपोर्टों के अनुसार, लोप नूर में चार विशाल हैंगर, नई टैक्सीवे, एक गोलाकार पैड और संभावित ईंधन भंडारण ढांचा तैयार किया जा रहा है। यह गोलाकार संरचना इंजन परीक्षण या विमानों के संचालन संबंधी गतिविधियों के लिए उपयोग की जा सकती है। निर्माण की गति और पैमाना यह दर्शाता है कि चीन यहां सामान्य परीक्षण सुविधा नहीं, बल्कि एक अत्यधिक गोपनीय एयरोस्पेस टेस्ट हब विकसित कर रहा है।
अगली पीढ़ी के विमानों का विकास
रिटायर्ड अमेरिकी नौसेना खुफिया अधिकारी जे. माइकल डाहम ने बताया कि इस बड़े विस्तार की शुरुआत अगस्त 2025 में हुई। इसी समय चीन के कथित छठी पीढ़ी के लड़ाकू विमान J-36 को पहली बार इस क्षेत्र में देखा गया। इसके 17 दिन बाद एक अन्य अगली पीढ़ी के विमान J-XDS या J-50 की भी इसी परिसर में उपस्थिति की जानकारी मिली। यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह संकेत करता है कि चीन एक साथ कई अत्याधुनिक लड़ाकू विमान कार्यक्रमों पर काम कर रहा है।
लोप नूर की भौगोलिक स्थिति
लोप नूर की सबसे बड़ी ताकत इसकी भौगोलिक स्थिति है। शिनजियांग क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां गोपनीय उड़ान परीक्षणों को आम निगरानी से दूर रखा जा सकता है। यह चीन को संवेदनशील प्रोटोटाइप विमानों के परीक्षण के लिए एक सुरक्षित स्थान प्रदान करता है। पहले से मौजूद 5 किलोमीटर लंबा रनवे इस सुविधा की महत्वाकांक्षा को और स्पष्ट करता है।
अमेरिका-चीन की वायु शक्ति की दौड़
लोप नूर का विस्तार उस समय हो रहा है जब अमेरिका और चीन अगली पीढ़ी की वायु शक्ति की दौड़ में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। भविष्य के लड़ाकू विमान केवल तेज या स्टील्थ नहीं होंगे, बल्कि वे उन्नत ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिस्टम, और लंबी दूरी के हथियारों के साथ नेटवर्क में काम करेंगे।
H-20 स्टील्थ बॉम्बर की संभावनाएं
लोप नूर के विस्तार ने चीन के रहस्यमय H-20 स्टील्थ स्ट्रैटेजिक बॉम्बर को लेकर अटकलों को भी जन्म दिया है। H-20 को लंबे समय से चीन का संभावित लंबी दूरी का स्टील्थ बॉम्बर माना जाता रहा है, लेकिन इसे अब तक सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित नहीं किया गया है। हालाँकि, नई संरचनाओं का आकार सवाल उठाता है।
भारत और हिंद-प्रशांत के लिए संदेश
इस घटनाक्रम का सामरिक महत्व केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। भारत और पूरे हिंद-प्रशांत क्षेत्र को चीन के इस तेजी से बढ़ते एयरोस्पेस ढांचे पर ध्यान देना चाहिए। शिनजियांग में विकसित हो रही परीक्षण क्षमता भविष्य के उन प्लेटफार्मों को जन्म दे सकती है, जो लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियारों और अत्याधुनिक सेंसर के साथ काम करेंगे।
