चीन की सक्रियता: ईरान पर अमेरिकी हमले की चेतावनी के बीच सुरक्षा वार्ता
चीन की भूमिका और ईरान की सुरक्षा चिंताएँ
ईरान पर संभावित न्यूक्लियर हमलों की खबरों के बीच चीन ने सक्रियता दिखाई है। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, एक नई सूचना ने वैश्विक कूटनीतिक हलचल को तेज कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के अंतिम न्यूक्लियर ठिकानों को महज 10 मिनट में नष्ट करने की चेतावनी दी है। इसी समय, अमेरिकी टीवी होस्ट टकर कार्लसन ने यह दावा किया है कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दबाव में अमेरिका ईरान पर परमाणु हमले पर विचार कर सकता है। इस गंभीर स्थिति के मद्देनजर, ईरान ने सुरक्षा वार्ता के लिए बीजिंग का रुख किया।
चीन और ईरान के बीच उच्च स्तरीय बैठक
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के उप सचिव अली बाघेरी ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग ई के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस बैठक में पश्चिम एशिया के बिगड़ते हालात, ईरान की संप्रभुता और अमेरिका की धमकियों पर गंभीर चर्चा हुई। वांग ई ने स्पष्ट रूप से कहा कि इस संकट का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। चीन ने किसी भी नए सैन्य टकराव के खिलाफ चेतावनी दी और तेहरान को सुरक्षा में समर्थन देने का आश्वासन दिया।
ट्रंप का बयान और ईरान की स्थिति
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर ढांचे को पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है, लेकिन ईरान के पिकैक्स पर्वत के पास कुछ ठिकाने अभी भी बचे हैं। ये ठिकाने 300 फीट गहरी ग्रेनाइट चट्टानों के नीचे स्थित हैं, जिन्हें पारंपरिक बमों से नहीं नष्ट किया जा सकता। इस स्थिति को देखते हुए, न्यूक्लियर स्ट्राइक एकमात्र विकल्प के रूप में चर्चा में है। टकर कार्लसन के अनुसार, नेतन्याहू अपनी राजनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए ट्रंप पर दबाव बना रहे हैं कि वे ईरान पर बड़ा हमला करें।
