चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर: खतरे में हैं या ताकतवर?
चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर की स्थिति
चीन तेजी से अपने एयरक्राफ्ट कैरियर का निर्माण कर रहा है, जिससे नई दिल्ली से लेकर टोक्यो और कैनबरा तक चिंता बढ़ गई है। हालाँकि, एक नए अध्ययन के अनुसार, इन कैरियरों को दुश्मन की पनडुब्बियों द्वारा आसानी से निशाना बनाया जा सकता है। यह चेतावनी वॉशिंगटन डीसी स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज़ (CSIS) द्वारा दी गई है।
CSIS ने बताया है कि कैसे अमेरिका और उसके सहयोगी प्रशांत क्षेत्र में किसी भी बड़े संघर्ष के दौरान चीन के कैरियर समूहों को खतरे में डाल सकते हैं। चीन ने अपनी ब्लू-वॉटर नेवी बनाने में भारी निवेश किया है, जिसमें फ़ुज़ियान कैरियर का समुद्री परीक्षण चल रहा है और कई अन्य कैरियर बनाने की योजना है। इन प्लेटफार्मों का उद्देश्य चीन की सीमाओं से दूर अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना है, जो अमेरिका के साथ समुद्री दबदबे की प्रतिस्पर्धा को दर्शाता है।
खतरे की रणनीतियाँ
रिपोर्ट में चीन के एयरक्राफ्ट कैरियर को निशाना बनाने के लिए पाँच 'लागत-बढ़ाने वाली' रणनीतियों का उल्लेख किया गया है। इनमें शामिल हैं: ज़मीन से मार करने वाले मिसाइल नेटवर्क, सैटेलाइट-गाइडेड लंबी दूरी के हवाई हमले, साइबर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, ड्रोन के झुंड और पनडुब्बी से घात लगाकर हमला करना।
CSIS की रिपोर्ट के अनुसार, चीन के कैरियर पनडुब्बी हमलों के प्रति अत्यधिक असुरक्षित हैं। अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों के पास एडवांस्ड पनडुब्बी बेड़े हैं, जो बिना पकड़े कैरियर समूहों पर हमला कर सकते हैं। ये पनडुब्बियाँ कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के करीब जाकर प्रभावी टॉरपीडो या क्रूज़ मिसाइल दाग सकती हैं।
चीन की क्षमता और चुनौतियाँ
पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (PLAN) ने अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे निकलने के लिए कई नए एयरक्राफ्ट और बड़े डेक तैयार किए हैं। हालाँकि, पनडुब्बी-रोधी युद्ध में चीन की स्थिति कमजोर है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि चीन की पनडुब्बियों का पता लगाने और ट्रैक करने की क्षमता में लगातार कमी आ रही है।
CSIS के अनुसार, चीन अपनी ताकत का प्रदर्शन करना चाहता है और जैसे-जैसे उसकी क्षमता बढ़ेगी, वह अपने कैरियर को अपने तटों से दूर ले जाएगा। चीन इन जहाजों को 'पहली द्वीप श्रृंखला' से आगे बढ़ाकर प्रशांत महासागर के अंदरूनी हिस्सों में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता है। जापान ने पहले ही बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को लेकर चेतावनी दी है और अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत कर रहा है।
