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चीन के राजदूत का बड़ा बयान: भारत को साथी मानें, प्रतिद्वंद्वी नहीं

चीन के राजदूत शू फेइहोंग ने भारत के साथ संबंधों को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है, जिसमें उन्होंने दोनों देशों को साझेदार मानने की अपील की है। उन्होंने व्यापार में वृद्धि और सहयोग के अवसरों पर भी जोर दिया। इस दौरान, उन्होंने मतभेदों को सुलझाने की राजनीतिक समझ की बात की। जानें, मोदी और जिनपिंग की हालिया मुलाकात के संदर्भ में चीन का भारत के प्रति क्या रुख है।
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चीन-भारत संबंधों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी


नई दिल्ली: वर्तमान में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग अमेरिका की यात्रा पर हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से हो रही है। इसी बीच, भारत के साथ संबंधों पर चीन की ओर से एक महत्वपूर्ण बयान आया है। दिल्ली में चीनी राजदूत शू फेइहोंग ने कहा कि भारत और चीन को एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं, बल्कि साझेदार के रूप में देखना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि दोनों देशों को खतरे के बजाय विकास के अवसरों के रूप में देखना चाहिए।


पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना की स्थापना की 77वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक कार्यक्रम में शू फेइहोंग ने भारत-चीन संबंधों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देश निकट पड़ोसी हैं और दोस्ताना संवाद तथा सहयोग इस रिश्ते की नींव रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों देशों को रणनीतिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ना चाहिए।


सहयोग और व्यापार के अवसर

राजदूत ने कहा कि चीन भारत के साथ मिलकर एक ऐसा रास्ता खोजना चाहता है, जिससे दोनों बड़े पड़ोसी देशों के बीच सहयोग बढ़ सके। उन्होंने आर्थिक संबंधों की मजबूती पर भी जोर दिया, यह बताते हुए कि इस वर्ष की पहली छमाही में दोनों देशों के बीच व्यापार 91.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 23.6 प्रतिशत अधिक है।


मतभेदों पर चर्चा

शू फेइहोंग ने स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच कुछ मतभेद हैं, लेकिन प्राचीन सभ्यताओं के रूप में, उनके पास इन्हें सुलझाने की राजनीतिक और ऐतिहासिक समझ है। उन्होंने कहा कि बीजिंग सीमा से संबंधित मुद्दों पर एक संतुलित दृष्टिकोण रखता है, जिसमें सीमा पर शांति बनाए रखने के साथ-साथ आपसी विश्वास को भी मजबूत किया जाना चाहिए।


मोदी और जिनपिंग की मुलाकात

राजदूत ने हाल ही में हुए ब्रिक्स सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात का भी उल्लेख किया, जिसमें दोनों नेताओं ने संबंधों को मजबूत करने पर सहमति जताई थी। उन्होंने ग्लोबल साउथ के साझा हितों की रक्षा करने की अपील भी की। यह बयान ऐसे समय में आया है जब जिनपिंग अमेरिका में ट्रंप से मिल रहे हैं, जिससे भारत के प्रति चीन का यह रुख महत्वपूर्ण माना जा रहा है।