चीन पर तिब्बत में बाढ़ की रिपोर्टिंग को लेकर सूचना नियंत्रण के आरोप
तिब्बत में बाढ़ के बाद की स्थिति
(वेनिंग सुन, यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी सिडनी) सिडनी, दो सितंबर - नेपाल और तिब्बत में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के चलते राहत और बचाव कार्य जारी हैं। इस बीच, सोशल मीडिया पर चीन पर इस आपदा की रिपोर्टिंग को नियंत्रित करने के आरोप बढ़ गए हैं। यह विवाद तब शुरू हुआ जब बीबीसी की संवाददाता लॉरा बिकर ने बताया कि चीन-तिब्बत सीमा पर जिरोंग बंदरगाह को भूस्खलन और बाढ़ के प्रभाव में दिखाने वाले वीडियो इंटरनेट से हटा दिए गए हैं।
सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएँ
बिकर के अनुसार, इसका एक कारण तिब्बत में राजनीतिक अस्थिरता को लेकर बीजिंग की चिंता हो सकती है। हालांकि, कुछ सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने बीबीसी की रिपोर्ट में शामिल फुटेज के स्क्रीनशॉट साझा किए हैं, यह बताते हुए कि ये वीडियो चीनी मीडिया में भी प्रसारित हुए थे। एक चीनी पत्रकार ने बीबीसी पर 'खुले तौर पर अफवाह फैलाने' का आरोप लगाया।
चीन की मीडिया नीति
चीन की सरकार लंबे समय से तिब्बत से संबंधित समाचारों में पश्चिमी मीडिया के कथित पूर्वाग्रह की आलोचना करती आ रही है। इस हफ्ते, सोशल मीडिया पर उसके समर्थकों ने बीबीसी को निशाना बनाते हुए इस दावे को फिर से उठाया। हालांकि, चीन के अंदर और बाहर रहने वाले सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं को सरकारी नियंत्रण का सामना करना पड़ता है।
बाढ़ के प्रभाव की रिपोर्टिंग
जिरोंग बंदरगाह के बाढ़ में डूबने के वीडियो वीशिन और रेडनोट जैसे प्लेटफार्मों पर दिखाई दिए, लेकिन बाद में उपयोगकर्ताओं के लिए उपलब्ध नहीं रहे। स्वतंत्र और विदेशी पत्रकारों के लिए आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच सीमित रही है, जिससे सूचना नियंत्रण एक बड़ा मुद्दा बन गया है। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन की पत्रकार एलिसन हॉर्न ने कहा कि उन्होंने तिब्बत की यात्रा की अनुमति के लिए कई बार अनुरोध किया, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली।
सरकारी मीडिया की कवरेज
चीन के सरकारी मीडिया में तिब्बत की बाढ़ की रिपोर्टिंग मुख्य रूप से पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के बचाव अभियानों और राष्ट्रपति शी चिनफिंग के नेतृत्व पर केंद्रित रही है। राहत सामग्री पहुंचाने के प्रयासों को भी प्रमुखता दी गई है, जबकि स्थानीय ग्रामीणों और उनके समुदायों पर आपदा के प्रभाव की रिपोर्टिंग अपेक्षाकृत कम रही है।
विदेशी पत्रकारों की स्थिति
नेपाल में विदेशी पत्रकारों को प्रभावित लोगों से बिना किसी प्रतिबंध के बातचीत करने की अनुमति मिली है। चीन में आपदा के दौरान 'सकारात्मक खबरों' पर जोर देने की नीति कोई नई नहीं है। 2008 में सिचुआन में आए भूकंप के बाद भी सरकारी मीडिया ने शुरुआत में व्यापक कवरेज की थी।
मीडिया पर नियंत्रण
विदेशी मीडिया ने खराब निर्माण वाले स्कूल भवनों के ढहने और स्थानीय अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाए थे। हालांकि, कुछ ही सप्ताह बाद सरकार ने स्कूलों के निर्माण से संबंधित सूचनाओं पर नियंत्रण बढ़ा दिया। 2011 की वेनझोउ रेल दुर्घटना के दौरान भी मीडिया पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए थे।
विशेषज्ञों की राय
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन के प्रतिबंधों के कारण पश्चिमी पत्रकारों के लिए घटनाओं की स्वतंत्र पुष्टि करना मुश्किल हो रहा है। इससे पश्चिम में चीन पर सेंसरशिप और सूचना छिपाने के आरोप मजबूत होते हैं, जबकि बीजिंग इसे तिब्बत पर पश्चिमी मीडिया के कथित पक्षपात के प्रमाण के रूप में देख सकता है।
