जयशंकर ने जी20 बैठक में ऊर्जा संकट पर उठाए गंभीर मुद्दे
जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक में ऊर्जा संकट पर चर्चा
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 31 अक्टूबर - विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वैश्विक तेल आपूर्ति में रुकावटों के खिलाफ कड़ी असहमति व्यक्त की। उन्होंने कहा कि ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर जानबूझकर हमले ऊर्जा की कीमतों को नियंत्रित करने की एक सोची-समझी रणनीति है। यह टिप्पणी उन्होंने अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान की, जो उस समय हुई जब अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है और पश्चिम एशिया से ऊर्जा आपूर्ति बाधित है।
जयशंकर ने बताया कि वर्तमान में दुनिया एक ऊर्जा संकट का सामना कर रही है, जो उत्पादन की कमी के कारण नहीं, बल्कि अनिश्चितता और आपूर्ति में बाधा के कारण है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि बैठक में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऊर्जा व्यापार पर जानबूझकर हमले एक रणनीति का हिस्सा हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो द्वारा आयोजित इस बैठक में उन्होंने कहा कि जी20 को ऊर्जा बाजारों को स्थिर और खुला रखने के लिए नेतृत्व प्रदान करना चाहिए।
विदेश मंत्री ने कहा कि ऊर्जा बाजारों में असंतुलन की घटनाएं बढ़ रही हैं और इनकी जटिलता भी बढ़ रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कम आय वाले देशों की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। जयशंकर ने कहा कि तेल और गैस के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि चुनिंदा मामलों में दी जाने वाली छूट इस स्थिति को स्पष्ट करती है। जयशंकर ने वैश्वीकृत बाजार में आपसी निर्भरता और इसके दूरगामी प्रभावों को कम करके नहीं आंकने की बात दोहराई। उन्होंने भारत की एलपीजी की विश्वसनीय और नियमित आपूर्ति की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जयशंकर ने बताया कि भारत का राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन इन खनिजों की खोज, उत्खनन और पुनर्चक्रण के सभी चरणों को शामिल करता है। उन्होंने जी20 के तहत महत्वपूर्ण खनिजों के पुनर्चक्रण को बढ़ावा देने के लिए एक पहल का प्रस्ताव रखा। इसके साथ ही, उन्होंने ऊर्जा भंडारण, छोटे मॉड्यूलर परमाणु संयंत्रों, हरित हाइड्रोजन और जैव ईंधन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
