जापान का भारत में टाइप 25 एंटीशिप मिसाइल का परीक्षण: रणनीतिक कारण
जापान का मिसाइल परीक्षण भारत में
जापान जल्द ही अपनी टाइप 25 एंटीशिप मिसाइल का परीक्षण करने की योजना बना रहा है, जो संभवतः भारत की भूमि पर किया जाएगा। यह जानना महत्वपूर्ण है कि जापान को ऐसा कदम उठाने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई। जापानी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि उनकी सेना भारत में मिसाइलों का परीक्षण करेगी, जिसमें टाइप 25 एंटीशिप मिसाइल शामिल है। इसके साथ ही, अटैक ड्रोन का भी परीक्षण किया जाएगा। हालांकि, जापान की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ओडिशा के चांदीपुर और अब्दुल कलाम द्वीप से यह परीक्षण किया जा सकता है।
जापान एक घनी आबादी वाला देश है, जिसके पास लाइव फायर परीक्षण के लिए पर्याप्त स्थान नहीं है। इसलिए, जापान ने क्वाड के सदस्य के रूप में भारत पर भरोसा जताया है और अपने अधिकारियों को भारत भेजा है ताकि वे अपने घातक हथियारों का परीक्षण कर सकें।
यह ध्यान देने योग्य है कि टाइप 25 एंटीशिप मिसाइल का विकास मुख्य रूप से चीन और उत्तर कोरिया जैसे देशों के खिलाफ किया गया है। जापान पूर्वी एशिया में हजारों द्वीपों से बना एक देश है, जिसके चारों ओर समुद्र है। वर्तमान में, जापान के सामने तीन प्रमुख प्रतिद्वंद्वी हैं: चीन, उत्तर कोरिया और रूस। चीन के साथ अमेरिका को लेकर तनाव और रूस के साथ सीमा विवाद के कारण जापान की सुरक्षा को खतरा है।
भारत-जापान संबंध
भारत और जापान के बीच एक विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी है, जो साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, आर्थिक सहयोग, और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री और रक्षा संबंधों पर आधारित है। जुलाई में, जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय बातचीत की और 'भारत-जापान विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' की समीक्षा की। चर्चा का मुख्य फोकस आर्थिक सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती, रक्षा विनिर्माण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्वच्छ ऊर्जा, और एक मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र पर था।
