डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान: होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का नियंत्रण और अमीर देशों से वसूली
अमेरिकी राष्ट्रपति का नया दावा
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर रहा है और इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए 'अमीर देशों' से धन भी वसूला जाएगा। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज़ के कार्यक्रम 'फॉक्स एंड फ्रेंड्स' में कहा कि यह क्षेत्र पहले से ही अमेरिका की निगरानी में था, लेकिन अब इसके खर्च का बोझ अन्य देशों पर डाला जाएगा।
सुरक्षा के लिए धन की मांग
"हम रक्षक बनेंगे, खर्च की भरपाई होगी"
ट्रंप ने इंटरव्यू में कहा, "हम इस जलडमरूमध्य का नियंत्रण ले रहे हैं। उनके पास कुछ नहीं है। हम इसके रक्षक बनेंगे।" उन्होंने आगे कहा, "हमें इसकी सुरक्षा के लिए पैसे मिलेंगे। बहुत सारा पैसा। हम बस इतना चाहते हैं कि अपने लोगों को खतरे में डालकर जो काम कर रहे हैं, उसका खर्च हमें मिले।"
महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से दुनिया का लगभग पांचवां हिस्सा तेल और गैस का परिवहन होता है। यही कारण है कि यह क्षेत्र अमेरिका और ईरान के बीच तनाव का एक बड़ा कारण बना हुआ है।
ईरान और अमेरिका के बीच टकराव
ईरान का दावा vs अमेरिका की नीति
ईरान का कहना है कि होर्मुज पर उसका पूरा नियंत्रण है, जबकि अमेरिका का मानना है कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां सभी देशों के जहाज बिना किसी रुकावट के गुजर सकते हैं। हाल ही में, ईरान ने होर्मुज से गुजर रहे एक जहाज पर हमला किया, जिससे तनाव और बढ़ गया। अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई की और होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों की सुरक्षा का आश्वासन दिया।
भविष्य की अनिश्चितता
सीज़फायर पर सवाल, आगे क्या?
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उनका कहना है कि पिछले महीने हुआ डिजिटल शांति समझौता अब "खत्म" हो चुका है। ईरान ने भी अपनी स्थिति को नरम नहीं किया है और तेहरान ने सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने की कसम खाई है।
कोई भी पक्ष पीछे हटने के संकेत नहीं दे रहा है। अब सभी की नजर इस पर है कि ट्रंप का "कंट्रोल और पैसा वसूली" वाला बयान खाड़ी देशों और ईरान में किस प्रकार की प्रतिक्रिया उत्पन्न करता है। होर्मुज को लेकर टकराव पहले से ही बढ़ चुका है, और अमेरिका के इस नए रुख से क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ सकती है।
