डोनाल्ड ट्रंप की इजरायली हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया: शांति समझौते की राह में बाधा?
ट्रंप की आलोचना
नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की कड़ी आलोचना की है। यह आलोचना उस समय आई जब इजरायल ने बेरूत में हमले किए, ठीक उसी समय जब अमेरिका और ईरान मध्य पूर्व में शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले थे। ट्रंप ने इस हमले की समय सीमा को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त की।
ट्रंप की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने समाचार वेबसाइट एक्सियोस से फोन पर बातचीत में कहा, "यह बहुत बुरा था। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था। हम समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले थे, बस एक घंटा बाकी था।" उन्होंने नेतन्याहू को स्थिति की गंभीरता को समझने में असफल बताया।
ट्रंप का सोशल मीडिया पोस्ट
ट्रंप का ट्रुथ सोशल पोस्ट
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर भी लिखा, "आज सुबह बेरूत पर हुआ हमला नहीं होना चाहिए था, खासकर उस दिन जब हम ईरान के साथ शांति समझौते के बहुत करीब थे।" उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।
“The Deal with Islamic Republic of Iran is now complete. Congratulations to all!” President Donald J. Trump 🇺🇸 pic.twitter.com/RdSwyEdEtO
— The White House (@WhiteHouse) June 14, 2026
इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव
ट्रंप ने कहा कि इजरायल और हिजबुल्लाह दोनों को और हमले नहीं करने चाहिए, लेकिन ईरान ने इजरायल के हमलों का जवाब देने की कसम खाई है। ईरानी सैन्य अधिकारी मोहम्मद जाफर असादी ने कहा कि बेरूत में इजरायली "अपराध" बिना जवाब के नहीं रहेंगे।
समझौते की स्थिति
समझौते पर अनिश्चितता बनी हुई
ट्रंप ने कहा कि समझौता अभी भी ट्रैक पर है और रविवार को साइन हो सकता है, जो उनके 80वें जन्मदिन का दिन भी है। हालांकि, ईरान ने कहा है कि अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। चर्चाएं राजनीतिक, कानूनी और तकनीकी स्तर पर चल रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, ड्राफ्ट समझौते में अमेरिका 25 अरब डॉलर के ईरानी फ्रोजन एसेट्स छोड़ने का वादा कर रहा है। ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य को व्यापार के लिए खोलने की बात मान सकता है। ईरान अपना मौजूदा परमाणु कार्यक्रम बनाए रखेगा लेकिन आगे यूरेनियम संवर्धन नहीं बढ़ाएगा।
अमेरिकी पक्ष का कहना है कि अंतिम समझौते में ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करना होगा और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम का स्टॉक हटाना होगा। इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका-ईरान वार्ता का समर्थन नहीं करता और लेबनान में अपनी सैन्य कार्रवाई का अधिकार रखता है। वहीं, ईरान लेबनान में स्थायी सीजफायर को किसी भी बड़े समझौते की शर्त बनाए हुए है।
