डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने पर भारत-अमेरिका व्यापार में नई चुनौतियाँ
भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्तों में तनाव
नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप के फिर से अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद, भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों में तनाव और कड़वाहट का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। टैरिफ के मुद्दे पर बढ़ते विवाद ने एक महत्वपूर्ण व्यापारिक समझौते को अधर में लटका दिया है। इसी बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रमुख पत्रकारों द्वारा लिखी गई नई किताब 'रेजीम चेंज' ने इस स्थिति में और उथल-पुथल मचा दी है। इस किताब में बताया गया है कि ट्रंप भारतीय टैरिफ के आंकड़ों को देखकर इतने नाराज हुए कि उन्होंने अपने मंत्री को खरी-खोटी सुनाई।
ट्रंप का गुस्सा और मंत्री की फटकार
किताब 'रेजीम चेंज' के अनुसार, यह विवाद तब शुरू हुआ जब अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लुटनिक ने ट्रंप के सामने भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए गए टैक्स का आधिकारिक ब्योरा प्रस्तुत किया। आंकड़ों को देखकर ट्रंप ने अपना आपा खो दिया और लुटनिक पर भड़क गए। उन्होंने इन आधिकारिक रिकॉर्ड्स को 'बकवास' और झूठा करार दिया। ट्रंप का मानना था कि भारत वास्तव में सरकारी आंकड़ों से कहीं अधिक टैक्स वसूलता है, और अमेरिकी सामानों पर 175 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाता है।
व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट का सच
हालांकि ट्रंप भारत पर 175 प्रतिशत टैक्स लगाने का दावा कर रहे हैं, लेकिन व्हाइट हाउस की आधिकारिक फैक्ट शीट उनके इस दावे का समर्थन नहीं करती। भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते के दस्तावेजों के अनुसार, भारत निश्चित रूप से अमेरिकी सामानों पर सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाले देशों में से एक है। लेकिन असली आंकड़े ट्रंप के अनुमान से काफी भिन्न हैं। भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर औसतन केवल 37 प्रतिशत का टैरिफ वसूलता है। कुछ विशेष अमेरिकी गाड़ियों और उनके पार्ट्स पर यह टैक्स 100 प्रतिशत या उससे अधिक हो सकता है, जो फिर भी ट्रंप के 175 प्रतिशत के दावे से कम है।
रूसी तेल की खरीद पर भारत को भारी टैक्स
भारत और अमेरिका के व्यापारिक रिश्ते तब और भी नाजुक हो गए जब भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखी। ट्रंप ने अगस्त 2025 में भारत पर आरोप लगाया कि वह रूसी तेल खरीदकर 'यूक्रेन युद्ध में पुतिन की मदद' कर रहा है। इसके बाद अमेरिका ने भारत पर पहले से लागू 25 प्रतिशत ड्यूटी को बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। इस भारी टैक्स ने भारत को ब्राजील और चीन जैसे ब्रिक्स देशों की कतार में खड़ा कर दिया है, जो इस समय अमेरिकी प्रशासन के सबसे सख्त टैक्स का सामना कर रहे हैं।
