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डोनाल्ड ट्रंप ने यमन में अमेरिकी हवाई हमले को क्यों रोका?

डोनाल्ड ट्रंप ने यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ अमेरिकी हवाई हमले को अंतिम क्षण में रोक दिया। यह निर्णय सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की अपील के बाद आया, लेकिन ट्रंप के सलाहकारों की राय भी इस फैसले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित निर्णय के बारे में।
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ट्रंप का अचानक निर्णय


नई दिल्ली: यमन में हूती विद्रोहियों के ठिकानों पर एक महत्वपूर्ण अमेरिकी हवाई हमले की योजना बनाई गई थी। सभी तैयारियां पूरी थीं, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतिम क्षण में इस ऑपरेशन को रोकने का निर्णय लिया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी सेना ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर हमला करने के लिए पूरी तरह से तैयार थी। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रंप से फोन पर संपर्क कर हूतियों के बढ़ते हमलों के खिलाफ सहायता मांगी थी।


रविवार को बदला माहौल

सूत्रों के अनुसार, प्रिंस सलमान की अपील से पहले ट्रंप ने अपने सलाहकारों के साथ हमले के बारे में नकारात्मक विचार व्यक्त किए थे। लेकिन फोन कॉल के बाद, उन्होंने पेंटागन को हवाई हमले की तैयारी का आदेश दिया। रविवार दोपहर तक स्थिति फिर से बदल गई और ट्रंप ने हमले को टालने का निर्णय लिया। इस समय यमन में कोई अमेरिकी कार्रवाई नहीं होगी।


व्हाइट हाउस ने इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। हालांकि, एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि अमेरिका का सऊदी अरब के साथ रक्षा समझौता है और वाशिंगटन अपने सहयोगियों की सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्ध है। ट्रंप के इस निर्णय के पीछे उनके सलाहकारों की राय भी एक महत्वपूर्ण कारण मानी जा रही है। कई सलाहकार सऊदी अरब के साथ मिलकर हूतियों के खिलाफ युद्ध में शामिल होने के पक्ष में नहीं थे।


अमेरिका-ईरान के बीच संभावित निर्णय

फॉक्स न्यूज के साथ बातचीत में, ट्रंप ने कहा कि वह ईरान के साथ बड़े युद्ध के संबंध में निर्णय लेने की स्थिति में हैं। हूतियों के बारे में उन्होंने कहा कि अमेरिका उनसे बातचीत कर रहा है और हूतियों ने अमेरिकी हितों पर हमला न करने पर सहमति जताई है। हालाँकि, हूतियों ने हाल ही में अमेरिकी जहाजों को निशाना नहीं बनाया है, लेकिन सऊदी जहाजों और ठिकानों पर लगातार मिसाइल हमले कर रहे हैं।


हूती विद्रोही 2014 से यमन की सरकार के खिलाफ लड़ाई कर रहे हैं, जिसे सऊदी अरब का समर्थन प्राप्त है। 2022 के बाद संघर्ष में कमी आई थी, लेकिन अब यह फिर से तेज हो गया है। हूतियों ने लाल सागर में सऊदी जहाजों की नाकाबंदी कर दी है और बाब अल-मंडेब स्ट्रेट जैसे रणनीतिक क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया है, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है।