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तालिबान की पाकिस्तान को चेतावनी: क्या बढ़ेगा सीमा पर तनाव?

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। तालिबान के रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान को चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य कार्रवाई का जवाब मजबूती से दिया जाएगा। यह स्थिति तब उत्पन्न हुई है जब दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई है। डूरंड लाइन का विवाद और TTP के हमले इस संघर्ष की जड़ में हैं। UNAMA ने आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभावों की भी चेतावनी दी है। क्या कूटनीति इस संकट का समाधान निकाल पाएगी? जानें पूरी कहानी में।
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नई दिल्ली में बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। तालिबान के रक्षा मंत्री मुल्ला मोहम्मद याकूब मुजाहिद ने इस्लामाबाद को स्पष्ट चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की संप्रभुता पर किसी भी हमले का जवाब "सोच-समझकर लेकिन मजबूती" से दिया जाएगा।


तालिबान की चेतावनी

मुजाहिद ने कहा कि "अब बहुत हो गया"। यदि पाकिस्तान अफगानिस्तान की क्षेत्रीय अखंडता के खिलाफ कोई सैन्य कार्रवाई करता है, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि तालिबान जल्दबाजी में जवाब नहीं देगा, लेकिन उनका इरादा मजबूत है।


यह बयान तब आया है जब तालिबान अफगानिस्तान में अपने शासन के पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। काबुल पहले भी कह चुका है कि वह अपनी स्वतंत्रता और भूमि के खिलाफ किसी भी खतरे का मुंहतोड़ जवाब देगा।


खुली लड़ाई का आगाज़

फरवरी 2026 में दोनों देशों के संबंधों में सबसे अधिक तनाव आया। पाकिस्तान ने TTP यानी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के बढ़ते हमलों के कारण पूर्वी अफगानिस्तान में लक्षित हवाई हमले किए। इसके जवाब में अफगान तालिबान ने सीमा पर जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। दोनों पक्षों के बीच बड़े पैमाने पर फायरिंग और सैन्य मुठभेड़ें हुईं।


पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान TTP को अपनी भूमि पर शरण दे रहा है, जबकि तालिबान इसे खारिज करता है और कहता है कि यह पाकिस्तान का आंतरिक मामला है। पाकिस्तान की रक्षा नेतृत्व ने इसे "ओपन वॉर" तक करार दिया है, क्योंकि लड़ाई शहरी क्षेत्रों में फैल गई थी।


डूरंड लाइन का विवाद

अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच 2670 किलोमीटर लंबी डूरंड लाइन आज भी विवाद का विषय है। अफगानिस्तान इसे आधिकारिक सीमा मानने से इनकार करता है। इसी सीमा पर क्रॉस-बॉर्डर हमले, आतंकवादी गतिविधियां और सैन्य अभियान सबसे बड़े मुद्दे बने हुए हैं। TTP के अलावा ISIS-K की मौजूदगी ने क्षेत्र की सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया है।


सामान्य नागरिकों पर प्रभाव

UNAMA यानी अफगानिस्तान में संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन ने कहा है कि इस संघर्ष में आम नागरिकों की जान जा रही है। हजारों लोग बेघर हो चुके हैं। सीमा बंद होने के कारण व्यापार और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति भी प्रभावित हुई है।


चीन सहित कई देशों ने मध्यस्थता की कोशिश की है, लेकिन अब तक कोई स्थायी युद्धविराम नहीं हो सका है। दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े हुए हैं। मुजाहिद की हालिया चेतावनी के बाद सवाल यह है कि क्या सीमा पर फिर से बड़ी सैन्य कार्रवाई होगी, या कूटनीति कोई समाधान निकालेगी।