तिब्बत में भूकंप के बाद आफ्टरशॉक से दहशत, बचाव अभियान जारी
तिब्बत में आफ्टरशॉक का अनुभव
चीन के स्वशासित क्षेत्र तिब्बत में एक बार फिर शनिवार सुबह भूकंप का झटका महसूस किया गया, जो कि दो दिन पहले आए भूकंप के बाद का आफ्टरशॉक था। यह झटका रिक्टर स्केल पर 4.5 की तीव्रता का था। इस घटना ने स्थानीय निवासियों में भय का माहौल पैदा कर दिया, लेकिन अभी तक किसी नए नुकसान या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है। भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, इस आफ्टरशॉक का केंद्र 31.485 उत्तरी अक्षांश और 93.528 पूर्वी देशांतर पर लगभग 10 किलोमीटर की गहराई में था।
चीन का बचाव अभियान
चीन के अधिकारियों ने तिब्बत में बचाव कार्य शुरू कर दिया है। वे बचे हुए लोगों की खोज के लिए ड्रोन, मानवरहित हवाई वाहनों (UAVs) और उपग्रहों का उपयोग कर रहे हैं। अब तक, उन्होंने 12,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया है और प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री भी भेजी है, जिसमें 1,000 प्रीफैब्रिकेटेड घर, 3,239 टेंट, 2,821 फोल्डिंग बेड और 4,280 रज़ाइयां शामिल हैं.
शी जिनपिंग की निगरानी
रिपोर्टों के अनुसार, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस व्यापक खोज और बचाव अभियान की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए उचित आवास की व्यवस्था करने का निर्देश दिया है और जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए हर संभव प्रयास करने की बात कही है।
भूकंप से हुई तबाही
अधिकारियों के अनुसार, भूकंप में मरने वालों की संख्या 16 हो गई है और 76 लोग घायल हुए हैं। गुरुवार को 10 किलोमीटर से कम गहराई में 7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिसने तिब्बत के नागकू शहर के दूरदराज के बाकेन काउंटी में भारी तबाही मचाई।
संचार और परिवहन पर प्रभाव
चीन की आधिकारिक समाचार एजेंसी के अनुसार, भूकंप के कारण संचार व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और स्थानीय रेलवे अधिकारियों को ट्रेनों को रोकना पड़ा। भूकंप के कारण चट्टानें खिसक गईं, जिससे नेशनल हाईवे 317 का एक हिस्सा भी प्रभावित हुआ है।
भूकंपों का इतिहास
1900 के बाद से, इस क्षेत्र में 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले छह भूकंप आ चुके हैं, जिनमें यह भूकंप भी शामिल है। इनमें से सबसे बड़ा भूकंप 8 नवंबर 1997 को शुआंगहू में आया था, जिसकी तीव्रता 7.5 थी.
