तुर्की और बांग्लादेश के बीच बढ़ते संबंध: भारत के लिए चिंता का विषय
तुर्की-भारत संबंधों में जटिलता
हाल के समय में तुर्की और भारत के बीच संबंध काफी जटिल हो गए हैं। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तुर्की ने पाकिस्तान को न केवल राजनयिक सहायता प्रदान की, बल्कि भारत के खिलाफ ड्रोन और गोला-बारूद भी उपलब्ध कराया। इस प्रकार की तुर्की की गतिविधियों ने भारत को चिंतित कर दिया है। इसके जवाब में, भारत ने अपनी सैन्य रणनीति को मजबूत करने का निर्णय लिया और आर्मेनिया, ग्रीस और साइप्रस के साथ अपने संबंधों को और बेहतर किया।
बांग्लादेश पर तुर्की की नजरें
तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने हाल ही में बांग्लादेश का दौरा किया। 5 जून को, उन्होंने बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान से ढाका में मुलाकात की। तुर्की का मीडिया इस यात्रा को सामान्य राजनयिक दौरे से अधिक महत्वपूर्ण मानता है, क्योंकि अंकारा एशिया में अपनी पारंपरिक साझेदारियों से आगे बढ़कर एक व्यापक भूमिका की तलाश में है।
क्या बांग्लादेश भारत को नाराज करेगा?
तुर्की का मीडिया यह भी बताता है कि बांग्लादेश, जो अपने शक्तिशाली पड़ोसी से घिरा हुआ है, रणनीतिक स्वायत्तता की तलाश में है। तुर्की को लगता है कि बांग्लादेश की नई सरकार में दोनों देशों के बीच रणनीतिक और सैन्य सहयोग को बढ़ावा देने की अपार संभावनाएं हैं।
तुर्की का रक्षा सहयोग का प्रस्ताव
तुर्की बांग्लादेश के साथ एक सुनियोजित रक्षा-औद्योगिक और रणनीतिक साझेदारी स्थापित करना चाहता है, जिससे ढाका की नई दिल्ली पर निर्भरता कम हो सके। तुर्की का मानना है कि बांग्लादेश की चीन पर निर्भरता जोखिम भरी है। तुर्की बांग्लादेश को प्रशिक्षण, रखरखाव, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, और अन्य रक्षा सहयोग प्रदान करने के लिए तैयार है।
तुर्की का दीर्घकालिक लक्ष्य
तुर्की की योजना केवल बांग्लादेश को हथियार बेचना नहीं है, बल्कि वह बांग्लादेश की सेना को आधुनिक बनाने की भी इच्छा रखता है। तुर्की चाहता है कि बांग्लादेश भारत के खिलाफ एक समान नीति अपनाए, जैसे कि मालदीव ने की थी।
