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तुर्की के लिए बढ़ती चुनौतियाँ: इजरायल, इंडिया और फ्रांस का गठजोड़

इजरायल, भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग ने तुर्की की चिंताओं को बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति एर्दोगन ने साइप्रस के साथ सहयोग बढ़ाने वाले देशों को चेतावनी दी है। भारत ने ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है, जिससे तुर्की अब तीन तरफ से घिरता नजर आ रहा है। साइप्रस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है, जो तुर्की के लिए एक नई चुनौती बन सकती है। इस स्थिति का क्या असर होगा, जानने के लिए पढ़ें पूरा लेख।
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तुर्की के लिए बढ़ती चुनौतियाँ: इजरायल, इंडिया और फ्रांस का गठजोड़

तुर्की की बढ़ती चिंताएँ

इजरायल, भारत और फ्रांस के बीच बढ़ते सहयोग ने तुर्की की चिंताओं को बढ़ा दिया है। यह स्थिति तुर्की के मीडिया में और राष्ट्रपति रेचप तैयप एर्दोगन के बयानों में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है। अंकारा में अपनी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी की संसदीय बैठक में, एर्दोगन ने साइप्रस के साथ सैन्य सहयोग बढ़ाने वाले देशों, विशेषकर इजरायल को एक स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा कि तुर्की अपनी संप्रभुता और पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की साइप्रसियों के अधिकारों की रक्षा के लिए किसी भी खतरे का कड़ा जवाब देगा।


भारत की रणनीतिक प्रतिक्रिया

एर्दोगन का कहना है कि साइप्रस द्वीप के आसपास तनाव बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, और तुर्की हर घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि तुर्की साइप्रस समुदाय के अधिकारों के खिलाफ किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेगा। इस बीच, पाकिस्तान के साथ तुर्की के बढ़ते सैन्य सहयोग का जवाब भारत ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया के साथ अपने संबंधों को मजबूत करके दे रहा है। इस रणनीति के तहत, तुर्की अब तीन तरफ से घिरता नजर आ रहा है। आर्मेनिया ने भारत से पिनाका रॉकेट, आकाश मिसाइल और रडार जैसी रक्षा सामग्री खरीदी है। इसके अलावा, ग्रीस, साइप्रस और आर्मेनिया ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने में रुचि दिखाई है। यदि यह समझौता होता है, तो तुर्की की स्थिति और भी कठिन हो जाएगी।


साइप्रस की भारत यात्रा

पिछले महीने, साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलीडेस ने भारत की तीन दिवसीय यात्रा की थी, जहां उन्होंने पीएम मोदी से मुलाकात की। दोनों देशों ने आपसी संबंधों को रणनीतिक स्तर तक ले जाने पर सहमति जताई। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि इस दौरान साइप्रस ने भारत की ब्रह्मोस मिसाइल, नागास्ट्रा-1 और स्काईस्ट्राइकर ड्रोन खरीदने में रुचि दिखाई। पिछले साल पाकिस्तान के साथ संघर्ष में इनका उपयोग किया गया था।


तुर्की की प्रतिक्रिया

तुर्की के रक्षा मामलों के विशेषज्ञ राउफ कोसे का कहना है कि भारत और इजरायल ने साइप्रस को हथियार मुहैया कराने के लिए हाथ मिलाया है। इसके परिणामस्वरूप, तुर्की को पाकिस्तान को और अधिक समर्थन देना होगा। पाकिस्तान और तुर्की को भारत-साइप्रस के खिलाफ मुकाबला करना होगा।


इजरायल की गतिविधियाँ

इजरायल साइप्रस के साथ अपने रक्षा सहयोग को बढ़ा रहा है, जबकि सीरिया और लेबनान में इजरायल की गतिविधियाँ तुर्की के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। इजरायल ने लेबनान के एक बड़े हिस्से पर कब्जा कर रखा है, और उसकी सेना की गतिविधियाँ बढ़ती जा रही हैं। एर्दोगन ने कहा कि दमिश्क और बेरूत तुर्की के लिए महत्वपूर्ण हैं, और तुर्की की सुरक्षा केवल हाटे से शुरू नहीं होती, बल्कि यह दमिश्क, अलेप्पो और बेरूत से भी जुड़ी है।


फ्रांस और तुर्की के बीच तनाव

फ्रांस और साइप्रस के बीच हाल ही में हुए सैन्य समझौते ने तुर्की को और अधिक चिंतित कर दिया है। तुर्की का मानना है कि यह समझौता अंतरराष्ट्रीय कानून और 1960 की साइप्रस संधियों का उल्लंघन है। तुर्की ने चेतावनी दी है कि वह साइप्रस तुर्कों की सुरक्षा को खतरे में डालने वाले किसी भी शत्रुतापूर्ण रवैये का कड़ा जवाब देगा।


जमीन पर तनाव का असर

साइप्रस और तुर्की के बीच तनाव अब जमीन पर भी दिखाई देने लगा है। तुर्की की सेना युद्धाभ्यास कर रही है, और ग्रीक मीडिया ने रिपोर्ट किया है कि तुर्की के फाइटर जेट ने यूरोपीय मंत्रियों के विमान को परेशान किया। तुर्की ने इन आरोपों का खंडन किया है। इसके अलावा, तुर्की ने आरोप लगाया है कि ग्रीस-साइप्रस मार्ग पर उड़ानों ने तुर्की-साइप्रस हवाई क्षेत्र का उल्लंघन किया।


तुर्की और साइप्रस के बीच लंबे समय से तनाव

तुर्की और साइप्रस के बीच संबंध दशकों से तनावपूर्ण हैं। 1974 से तुर्की ने साइप्रस के एक तिहाई हिस्से पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिसे वह उत्तरी साइप्रस कहता है। पिछले साल, पीएम मोदी ने साइप्रस की यात्रा की थी और सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया था।