थाईलैंड में उईगर मुसलमानों को मंदिर पर हमले के लिए फांसी की सजा
थाईलैंड की अदालत ने 2015 में बैंकॉक के एरावान मंदिर में हुए बम धमाके के मामले में दो उईगर मुसलमानों को फांसी की सजा सुनाई है। इस हमले में 20 लोगों की मौत हुई थी। यह मामला उईगर मुसलमानों के खिलाफ चीन के अत्याचारों के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है, जहां उन्हें धार्मिक स्वतंत्रता नहीं मिलती। जानें इस विवादास्पद मामले के बारे में और क्या है इसके पीछे की कहानी।
| Jun 12, 2026, 19:42 IST
थाईलैंड की अदालत का ऐतिहासिक फैसला
भारत में करोड़ों लोग इस समाचार को सुनकर चौंक जाएंगे। आपने सुना होगा कि चीन उईगर मुसलमानों पर अत्याचार कर रहा है, लेकिन हाल ही में इन उईगर मुसलमानों ने एक ऐसा कृत्य किया है जो आपको हैरान कर देगा। दरअसल, थाईलैंड की अदालत ने दो उईगर मुसलमानों को एक मंदिर पर हमले के लिए फांसी की सजा सुनाई है। यह मामला 2015 में बैंकॉक के प्रसिद्ध एरावान मंदिर में हुए बम धमाके से जुड़ा है, जिसमें 20 लोगों की जान गई थी और 120 लोग घायल हुए थे। आपको बता दें कि एरावान मंदिर हिंदू देवता ब्रह्मा को समर्पित है, जहां थाईलैंड के हिंदू भगवान ब्रह्मा की पूजा की जाती थी। लेकिन इसी मंदिर में दो उईगर मुसलमानों ने आतंकवादी हमला किया।
सजा का ऐलान
इसी अपराध के लिए अब इन दोनों उईगर मुसलमानों को फांसी पर लटकाने का निर्णय लिया गया है।
दोषियों की पहचान
दोषी ठहराए गए दोनों आरोपियों की पहचान यूसुफ मिराइल और बिलाल मोहम्मद के रूप में हुई है। यह शायद पहली बार है जब मंदिर पर हमले के लिए दो मुस्लिम अपराधियों को फांसी की सजा दी जा रही है। आपको बताना चाहेंगे कि चीन के डर से उईगर मुसलमान अपने देश में दाढ़ी नहीं रख सकते, रोजा नहीं रख पाते और महिलाएं बुर्का नहीं पहन सकतीं। मस्जिदों को चीनी कानून के अनुसार बनाया जाता है। चीन ने उईगर मुसलमानों के लिए 29 नामों की एक सूची भी जारी की है, जिसमें कहा गया है कि वे अपने बच्चों के नाम मोहम्मद, जिहाद, इस्लाम, इमाम, अजहर और सद्दाम नहीं रख सकते। लेकिन जब ये उईगर मुसलमान चीन से बाहर निकलते हैं, तो दूसरे देशों में जाकर हिंदू मंदिरों पर हमले करते हैं।
थाईलैंड के मंदिरों का महत्व
थाईलैंड में कई प्रसिद्ध हिंदू मंदिर और तीर्थ स्थल हैं, जहां भारतीय और थाई वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण देखने को मिलता है। थाईलैंड के बौद्ध भी हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करते हैं।
संस्कृति और विवाद
दोनों संस्कृतियों के बीच गहरा ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध है। दिलचस्प बात यह है कि एक शिव मंदिर को लेकर थाईलैंड और उसके पड़ोसी देश कंबोडिया के बीच दशकों से संघर्ष चल रहा है। दोनों देश इस मंदिर के लिए आपस में लड़ रहे हैं, जबकि 1962 में इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस ने प्रीह वेहियर नामक इस मंदिर को कंबोडिया का हिस्सा माना था। इसके बावजूद थाईलैंड इस शिव मंदिर को अपने पास लाना चाहता है, जिसके चलते कई बार दोनों देशों के बीच संघर्ष हो चुका है।
